Thursday, 3 April 2025

डीटीयू में फीस वृद्धि का विरोध

नई दिल्ली, 3 अप्रैल। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के नेतृत्व में आज दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) में छात्रहित से जुड़े गंभीर मुद्दों को लेकर एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया गया। इस आंदोलन में सैकड़ों छात्रों ने भाग लिया और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। विश्वविद्यालय में हो रही अनुचित फीस वृद्धि, हॉस्टल शुल्क में तीन गुना बढ़ोतरी, बैकलॉग एवं मेकअप परीक्षा शुल्क में मनमानी बढ़ोतरी जैसी समस्याएँ छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रही हैं। इसके अतिरिक्त, मेस में खराब गुणवत्ता का भोजन, परीक्षा परिणाम में देरी, नई ग्रेडिंग प्रणाली की विसंगतियाँ, और प्रशासन की अकर्मण्यता छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।

अभाविप ने इस प्रदर्शन के माध्यम से न केवल इन मुद्दों को उजागर किया, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल समाधान की माँग भी की। शिक्षण गुणवत्ता में गिरावट, शिकायत निवारण प्रणाली की निष्क्रियता, कैंपस की मूलभूत सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को लेकर छात्रों में गहरी नाराजगी है। मुख्य कैंटीन और विश्वविद्यालय के बैक गेट को पुनः खोलने की माँग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण छात्रों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदर्शन के बाद, एबीवीपी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय कुलपति से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से सभी समस्याओं पर ठोस कदम उठाने की माँग रखी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के भीतर सभी मुद्दों पर ठोस निर्णय लेकर समाधान की दिशा में कार्य किया जाएगा।

एबीवीपी डीटीयू इकाई अध्यक्ष अजय दहिया एवं इकाई मंत्री नितेश महाला ने कहा की विश्वविद्यालय प्रशासन को विद्यार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से लेना होगा और उनका शीघ्र समाधान सुनिश्चित करना होगा। इसी संदर्भ में, एबीवीपी प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति को विभिन्न छात्र-संबंधी मुद्दों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा है। प्रशासन ने हमें आश्वासन दिया है कि एक सप्ताह के भीतर सभी समस्याओं के समाधान पर निष्कर्ष पर पहुँचा जाएगा। यदि इस अवधि में ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो विद्यार्थी परिषद मजबूती से आवाज़ उठाएगी और आवश्यकता पड़ने पर बड़े स्तर पर आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेगी।

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा किए जारहे पर्यावरणीय क्षति का विरोध


नई दिल्ली, 3अप्रैल। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय मंत्री श्रवण बी. राज के नेतृत्व में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की और हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की 400 एकड़ भूमि के अतिक्रमण व अवैध नीलामी के मुद्दे पर ज्ञापन सौंपा। यह भूमि कांचा, गाचीबोवली में स्थित है और तेलंगाना सरकार द्वारा निजी संस्थाओं को बेचने के लिए नीलाम की जा रही है। प्रतिनिधिमंडल ने पर्यावरण मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की, ताकि विश्वविद्यालय की जैव विविधता, वनस्पतियों और जीवों को अतिक्रमण से बचाया जा सके।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार अपने निहित स्वार्थों के तहत आईटी हब विकास परियोजना की आड़ में विश्वविद्यालय की भूमि को अपने करीबी निजी संस्थानों को देने के लिए नीलाम कर रही है। सरकार ने पहले ही जंगल को बुलडोज़र से साफ करने का काम शुरू कर दिया है और छात्र समुदाय की विरोधी आवाज़ों को दबाने का प्रयास कर रही है। यह 400 एकड़ भूमि घने हरित क्षेत्र, दुर्लभ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं का आश्रय स्थल है, जहां 734 प्रकार की वनस्पतियां, 220 प्रकार की पक्षी प्रजातियां और संकटग्रस्त भारतीय स्टार कछुआ जैसे जीव पाए जाते हैं। इस क्षेत्र में मौजूद ‘पीकॉक लेक’ और ‘बफैलो लेक’ स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में सहायक हैं। इसके अलावा, हैदराबाद की भूवैज्ञानिक धरोहर का प्रतीक ‘मशरूम रॉक’ भी इसी भूमि का हिस्सा है।

अभाविप द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कई प्रमुख मांगें सम्मिलित हैं, जिनमें पर्यावरण मंत्रालय द्वारा त्वरित हस्तक्षेप कर जंगलों की कटाई से हो रहे भूमि क्षरण को रोकना, हैदराबाद की पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न अंग मानी जाने वाली समृद्ध वनस्पतियों और जीवों का संरक्षण सुनिश्चित करना, विश्वविद्यालय परिसर में रहने वाली संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाना और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना आदि उल्लेखित है। साथ ही, इस क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय संपत्ति के रूप में मान्यता देने की मांग भी उठाई गई।

अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री श्रवण बी. राज ने कहा की रेवंत रेड्डी सरकार ने अपने निहित स्वार्थों को पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय की भूमि पर अतिक्रमण शुरू कर दिया है और निजी संस्थाओं को लाभ पहुंचाने के लिए अवैध कार्यों को अंजाम दे रही है। सरकार ने पहले ही बुलडोज़र लगाकर इस शहरी जंगल को नष्ट करने का कार्य आरंभ कर दिया है, जिससे क्षेत्र की पारिस्थितिक संतुलन और पर्यावरणीय स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। आज हमारे प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर इस अवैध अतिक्रमण को तत्काल रोकने और हैदराबाद क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। वहीं एबीवीपी की राष्ट्रीय मंत्री शिवांगी खारवाल ने कहा की विश्वविद्यालय परिसर के भीतर स्थित प्राकृतिक आवास पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया ‘ग्लोबल वार्मिंग’ और पर्यावरणीय क्षरण जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, इस महत्वपूर्ण हरित क्षेत्र का विनाश न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करेगा, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी गंभीर संकट पैदा करेगा। चूंकि रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार ने विश्वविद्यालय की भूमि पर अतिक्रमण करने की साजिश रची है, इसलिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद लगातार इस मुद्दे पर संघर्षरत है और छात्र समुदाय की आवाज़ को बुलंद कर रही है। हम तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे, जब तक कि सरकार विश्वविद्यालय की भूमि और इस जंगल में रहने वाले निर्दोष जीव-जंतुओं को नष्ट करने की अपनी घृणित योजना को पूरी तरह छोड़ नहीं देती।

वनवासी कल्याण आश्रम ने वक्फ बोर्ड से संबन्धित बिल का किया स्वागत

नई दिल्ली 2 अप्रैल। पिछले दिनो लोक सभा में वक्फ बोर्ड के प्रावधानों में सुधार के संदर्भ में चर्चा शुरू हुई और देर रात बिल 288 मतों से पारित हुआ। वनवासी कल्याण आश्रम ने कुछ समय पूर्व जेपीसी के समक्ष देश भर के विभिन्न स्थानों पर अपना पक्ष रखते हुए ज्ञापन दिएं थे। उसी के कारण जेपीसी ने अपनी रिपोर्ट में सरकार से यह सिफ़ारिश की कि वक़्फ़ बिल में जनजातियों की ज़मीन की सुरक्षा के प्रावधान करें। 

वनवासी कल्याण आश्रम ने गत 15 दिनों के सतत प्रयासों का यह परिणाम है कि कानून एवं अल्पसंख्यक विभाग के माननीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने लोक सभा में यह घोषणा की कि जनजातियों की ज़मीन; संविधान की पाँचवी और छठी अनुसूची की जनजाति भूमि वक़्फ़ के दायरे से बाहर रहेगी। वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय सत्येंद्र सिंह मे कहा कि जनजातियों की भूमि को सुरक्षित रखने के लिये भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का बहुत बहुत आभार और अभिनंदन। 

नव हिन्द स्कूल में यज्ञ के साथ नए सत्र का शुभारंभ


नई दिल्ली, 3 अप्रैल। नई रोहतक रोड स्थित नव हिन्द स्कूल में शिक्षा सत्र 2025-26 का शुभारंभ वैदिक रीति से यज्ञ के साथ किया गया। इस पवित्र आयोजन में प्रधानाचार्या श्रीमती सीमा खर्बंदा सहित सभी शिक्षकगण, छात्र-छात्राएँ एवं विद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। यज्ञ के माध्यम से विद्यालय प्रांगण को शुद्ध एवं सकारात्मक ऊर्जा से भरते हुए, सभी ने मिलकर नवीन सत्र के सफल संचालन की प्रार्थना की। इसके पश्चात् छात्रों एवं शिक्षकों ने निष्ठा, ईमानदारी, अनुशासन एवं उत्कृष्ट शिक्षा का संकल्प लिया।

प्रधानाचार्या सीमा खर्बंदा ने इस अवसर पर सभी को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को संस्कारों और मूल्यों से संवारने का माध्यम है। उन्होंने छात्रों को परिश्रम, संयम और आत्मनिर्भरता के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने नए सत्र में श्रेष्ठ उपलब्धियाँ हासिल करने और विद्यालय को गौरव दिलाने का संकल्प लिया। इस शुभ अवसर पर सभी ने यज्ञ की दिव्य आहुति के साथ उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

माँ कात्यायनी देवी की पूजा अर्चना


नई दिल्ली, 3 अप्रैल। शक्तिपीठ  झंडेवाला देवी  मंदिर मे आज शारदीय नवरात्र के पांचवे दिन माँ के छठ्वें स्वरूप कात्यायनी का श्रृंगार व पूजा अर्चना की गई l इनका वाहन सिंह है l विश्व प्रसिद्ध महर्षि कात्या ने भगवती जगदंबा की उपासना करते हुए बहुत वर्षो तक कठोर तपस्या की l उनकी इच्छा थी की माँ भगवती उनके घर पुत्री रूप के जन्म ले l उनकी प्रार्थना स्वीकार हुई और माँ कात्यायनी स्वरूप मे उनके घर उत्पन्न हुई। पेयजल की पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था की गई है l लाइनों में खड़े भक्तों को अंतिम छोर तक पेयजल की आपूर्ति की जाती है l पंक्तियों मे खड़े भक्तों के लिए मधुर भक्ति गीत – संगीत की स्वर लहरियाँ गूँजती रहती है जिससे भक्तों का उत्साह बना रहे l प्रत्येक जूता स्टैंड और मंदिर के प्रवेश द्वार पर भक्तो के हाथो को सैनेटाईज करने की व्यवस्था की गई है। प्रात: 4:00 बजे से रात्रि 12.00 बजे तक के सारे कार्यकर्मों का सीधा प्रसारण झण्डेवाला देवी मंदिर के यूट्यूब चैनल, वेबसाईट व फेसबुक पर किया गया l आज मंदिर में प्रात 9-00 बजे से रात्रि देर तक विभिन्न कीर्तन मंडलियों द्वारा महामाई का गुणगान किया गया। मैट्रो स्टेशन से आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए निशुल्क ई-रिक्शाओं की व्यवस्था की गई है जिस का भक्तजन भरपूर उपयोग कर रहे हैं। कल छठे दिन माँ के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि देवी जी की पूजा-अर्चना की जायेगी l

सनातन विरोधी ममता बनर्जी सरकार तत्काल बर्खास्त हो : जय भगवान गोयल


नई दिल्ली, 3 अप्रैल। नई दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर आज यूनाईटेड हिन्दू फ्रंट और राष्ट्रवादी शिवसेना द्वारा ममता बनर्जी सरकार को तत्काल बर्खास्त किए जाने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर ममता बनर्जी के पुतले पर कार्यकर्ताओं ने कालिख पोत कर व शव यात्रा निकालकर अपना विरोध जताया और भारत की माननीय राष्ट्रपति जी, प्रधानमंत्री भारत सरकार, गृहमंत्री, भारत सरकार व पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को इस संबंध में ज्ञापन दिया। इस अवसर पर यूनाईटेड हिन्दू फ्रंट के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रवादी शिवसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष व वरिष्ठ भाजपा नेता श्री जय भगवान गोयल जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी द्वारा लगातार ऐसी नीतियाँ अपनाई जा रही हैं जो हिन्दू धर्म एवं सनातन संस्कृति के विरुद्ध हैं। उनके शासनकाल में दुर्गा पूजा, राम नवमी जैसे हिन्दू पर्वों पर प्रशासनिक दमन देखने को मिलता है, जबकि मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति खुलेआम की जा रही है। इसके अतिरिक्त, यह भी संज्ञान में आया है कि बांग्लादेशी रोहिंग्या घुसपैठियों को संरक्षण देकर, उनके पहचान पत्र बनवाकर उन्हें अवैध रूप से भारतीय नागरिकता दिलाने की प्रक्रिया जारी है। यह न केवल देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के भी विपरीत है। श्री गोयल ने कहा कि ईद के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा सनातन धर्म को गन्दा कहकर अपमानित किया गया जो धार्मिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों के प्रतिकूल हैं। इसी प्रकार, महाकुंभ को “मृत्युकुंभ“ की संज्ञा देकर करोड़ों हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने का कार्य भी उन्होंने किया है। जहां विश्व स्तर पर भारत के वासुदेव कुटुम्बकम भाव के कारण सारी दुनिया हमारी सनातन परंपरा को नमन् कर रही है, वहीं समय समय पर ममता बनर्जी ऐसे व्यक्तव्य देती है जैसे कि पश्चिम बंगाल  भारत का एक राज्य न होकर बांग्लादेश व् पाकिस्तान की तरह एक मुस्लिम कट्टरपंथी देश हो। यह सभी घटनाएँ दर्शाती हैं कि ममता बनर्जी की सरकार हिंदू विरोधी नीतियों को बढ़ावा दे रही है और इससे समाज में गहरा आक्रोश उत्पन्न हो रहा है। 

श्री गोयल ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी अत्यंत दयनीय हो चुकी है। महिला सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लग चुके हैं, जिसमें हाल ही में एक नर्स की हत्या के मामले में प्रशासन की लचर कार्रवाई इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। उन्हांने कहा कि पश्चिम बंगाल में वर्तमान सरकार संविधान के सिद्धांतों का पालन करने में असमर्थ हो रही है और वहाँ के हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं, इसलिए हमारी यह मांग है कि ममता बनर्जी सरकार को तत्काल बर्खास्त कर पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाये। 

इस अवसर पर सर्वश्री योगी अमरनाथ जी महाराज (उपाध्यक्ष, दिल्ली प्रदेश), मनदीप गोयल (राष्ट्रीय प्रवक्ता), धर्मेन्द्र बेदी (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), ईश्वर चौधरी (राष्ट्रीय सचिव), जय प्रकाश बघेल (उपाध्यक्ष, दिल्ली प्रदेश), डॉ. जितेन्द्र यादव (उपाध्यक्ष, दिल्ली प्रदेश), अवध कुमार (संगठन महामंत्री दिल्ली प्रदेश), श्रीकांत यादव (सचिव, दिल्ली प्रदेश), सांवर तायल (सचिव, दिल्ली प्रदेश), मुकेश गुप्ता (अध्यक्ष, ऑटो प्रकोष्ठ कश्मीरी गेट), अनुराग मिश्रा (ऑटो प्रकोष्ठ फरीदाबाद स्टैंड), कृपाराम शर्मा (दिल्ली प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य), तुफानक्रांतिकर ((दिल्ली प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य), दीपक रावत (प्रचारमंत्री दिल्ली प्रदेश), अभिषेक जैन (अध्यक्ष, रोहताश नगर), सुमन प्रजापति (सचिव दिल्ली प्रदेश), काजल वर्मा (अध्यक्ष, पूर्वी करावल नगर वि.स.), लक्ष्मी देवी (सचिव, दिल्ली प्रदेश), सोनिया चौधरी (अध्यक्ष, राम नगर) आदि पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित थे। 

Wednesday, 2 April 2025

हैदराबाद विश्वविद्यालय की 400 एकड़ भूमि की नीलामी को लेकर एबीवीपी का विरोध, शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन


नई दिल्ली, 2 अप्रैल। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर हैदराबाद विश्वविद्यालय की 400 एकड़ भूमि के अतिक्रमण और नीलामी के गंभीर मुद्दे पर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि केंद्र सरकार इस भूमि को बचाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करे और विश्वविद्यालय को उसका अधिकार वापस दिलाए। इस संदर्भ में अभाविप ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर तेलंगाना सरकार की मनमानी और छात्रों की आवाज को दबाने के प्रयासों की कड़ी निंदा की। परिषद ने स्पष्ट किया कि शिक्षा और अनुसंधान के लिए समर्पित इस भूमि का निजी कंपनियों को सौंपा जाना न केवल अनुचित और निंदनीय है, बल्कि इससे क्षेत्र की पारिस्थितिक संतुलन भी गहरी क्षति पहुंचेगी। यह भूमि न केवल शैक्षिक महत्व रखती है, बल्कि अपने समृद्ध जैवविविधता के कारण एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय धरोहर भी है। यहां अनेक दुर्लभ प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है, जिनके अस्तित्व पर संकट मंडराएगा। इस भूमि का विनाश जैविक तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा, जिससे जलवायु संतुलन, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय स्थिरता पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

हैदराबाद विश्वविद्यालय की यह भूमि केवल एक भूखंड नहीं, बल्कि एक शैक्षणिक और पारिस्थितिक धरोहर है, जिसे किसी भी स्थिति में नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। जब अभाविप कार्यकर्ताओं और छात्र समुदाय ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, तो तेलंगाना पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति के बिना जबरन परिसर में घुसकर छात्रों को गिरफ्तार कर लिया। यह न केवल छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है, बल्कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर भी सीधा प्रहार है। अभाविप मांग करती है कि केंद्र सरकार हस्तक्षेप कर इस 400 एकड़ भूमि को तुरंत विश्वविद्यालय को लौटाए और पूरे 2320 एकड़ भूमि का आधिकारिक हस्तांतरण सुनिश्चित करे, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार के अतिक्रमण की संभावना समाप्त हो सके।

इस विषय पर अभाविप की राष्ट्रीय मंत्री शिवांगी खारवाल ने कहा की हैदराबाद विश्वविद्यालय की भूमि राष्ट्र की शैक्षिक और पर्यावरणीय धरोहर है, इसे निजी कंपनियों को सौंपना छात्रों के अधिकारों पर कुठाराघात है। अभाविप कोई समझौता नहीं करेगी और यदि आवश्यक हुआ, तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन भी करेगी।

अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री श्रवण बी. राज ने कहा की शैक्षणिक संस्थानों की भूमि पर अतिक्रमण किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। विश्वविद्यालयों की भूमि का उद्देश्य केवल शिक्षा और शोध होना चाहिए, न कि व्यावसायिक मुनाफे के लिए नीलामी। हम इस अन्याय के खिलाफ छात्रों को संगठित कर संघर्ष को और तेज करेंगे और हर संभव कदम उठाएंगे जिससे विश्वविद्यालय को उसका अधिकार मिले।हमने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जी को ज्ञापन सौंपा, तो उन्होंने आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर समाधान की मांग की गई है और केंद्र सरकार जल्द ही ठोस कदम उठाएगी।अभाविप देशभर के छात्र समुदाय से इस भूमि रक्षा आंदोलन में समर्थन देने की अपील करती है।