Sunday, 24 May 2026

बिरसा मुण्डा के उलगुलान के बाद यह समागम सबसे बड़ा जनजाति आंदोलन : गृहमंत्री अमित शाह


नई दिल्ली। 24 मई। दिल्ली के लाल किला मैदान में जनजाति सांस्कृतिक समागम के भव्य आयोजन के मौके पर भारत सरकार के गृहमंत्री अमित शाह ने लगभग 1.5 लाख जनजातियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह समागम जनजातियों के महाकुंभ के नाम से जाना जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि यह सांस्कृतिक समागम आने वाले अनेक वर्षों तक जनजातियों के अस्तित्व , अस्मिता और संस्कृति के आंदोलन को नई पहचान देने के रूप में जाना जाएगा।  उन्होंने कहा कि मैंने भगवान बिरसा मुंडा को नहीं देखा, लेकिन आज यहां उपस्थित जनजातियों में  उनकी छबि प्रतिबिंबित हो रही है, मैं उनको नमन करता हूं। शाह जी ने सतत विकास के मूलाधार को बताते हुए भगवान बिरसा मुंडा के जल, जंगल जमीन को संरक्षित करने के प्रयास को सार्वभौमिक बताया। उन्होंने कहा कि प्रकृति पूजा ही सनातन संस्कृति का मूल आधार है। गृह मंत्री जी ने कहा कि यूसीसी के कानूनों के लेकर जनजातीय समाज को आश्वस्त करते हुए कहा कि यूसीसी कानून उनको प्रभावित करने के उद्देश्य से नहीं बना है। शाह जी ने यह भी बताया कि जनजाति समाज के कल्याण का काम भाजपा सरकार के आने बाद शुरू हुआ, आदरणीय अटल जी ने जनजाति कल्याण मंत्रालय की स्थापना किया था।
जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत जी ने कहा कि जनजातियों में धर्मांतरण का प्रभाव काफी तेजी से दिखाई पड़ रहा है, जो हमारे समाज के लिए कैंसर है। उन्होंने कहा कि आज यहां उपस्थित जनजाति समाज एक जनसमुद्र है। जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ राज किशोर हांसदा ने कहा कि धर्मपरिवर्तन कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे। अगर हम परिवर्तित हो जायेंगे तो हमारी संस्कृति समाप्त हो जाएगी।
जनजाति सुरक्षा मंच के हर्ष चौहान ने कहा कि जनजातीय समाज भारत की रक्षा करता है। पूरे भारत में व्याप्त 700 से अधिक जनजतीय समाज मिलकर अंग्रेजों से लोहा लिया। उन्होंने कहा कि जनजाति सनातन धर्म के मूल है और जो कहते है हमारा कोई धर्म नहीं है हम उनके विरोधी है। 
तेची गुबिन ने कहा कि अपने अपने जाति में जो धर्मांतरण हो रहा है उसको तेजी से रोकने की आवश्यकता है। उन्होंने भारत सरकार से मांग किया कि जो धर्मांतरण स्वीकार कर लिए है वे आरक्षण का दोहरा लाभ न उठा सके इसके लिए अनुच्छेद 314 के तहत उनके आरक्षण को समाप्त कर दिया जाए। 
बुधरी ताती ने कहा कि हमारी मातृ शक्ति जब जागती है उसे कोई रोक नहीं सकता है। उन्होंने अपने समाज के लोगों से आह्वान किया कि वे आगे आए और साथ मिलकर अपने समाज के सुरक्षित करने का प्रयास करे। ताती जी ने कहा कि जो अपने समाज की सुरक्षा आज करता है उनकी आने वाली पीढ़ी सुरक्षित होती है।
जनजतीय आयोग के सलाहकार व पूर्व जज प्रकाश उईके ने कहा कि मिशनरियों के कहने पर बिरसा मुंडा को जेल में डाला गया था। उन्होंने कहा कि जेल में रहते हुए भी भगवान बिरसा मुंडा जब टहलते थे तो उनसे अंग्रेजी हुकूमत खौफ खाती थी। भगवान बिरसा मुंडा का संपूर्ण जीवन जल, जंगल, जमीन को बचाने के प्रति समर्पित रहा। यही संघर्ष हमारे संस्कृति को जीवित रखने का कार्य कर रहा है।
वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने कहा कि बिरसा समस्त जनजातियों के भगवान रूपी आदर्श पुरुष है। उन्होंने कार्यक्रम को जनजाति समाज के लिए कुंभ की संज्ञा प्रदान किया। उन्होंने बताया कि बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों से संघर्ष किया, धर्मांतरण को रोकने के लिए संघर्ष किया,अध्यक्ष जी ने कहा कि जनजाति समाज सरकार के साथ सहयोग की भूमिका रही है और आगे भी रहेगी।
यह सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित किया गया। इस आयोजन में देशभर के जनजाति समाज की सांस्कृतिक अस्मिता, आस्था और पारंपरिक जीवन मूल्यों की झाँकी बड़े स्तर पर देखने को मिला।  इस ऐतिहासिक समागम में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 1.5 लाख जनजातीय समाज के प्रतिनिधि  एवं समाजबंधुओं की सहभागिता देखने को मिली। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह से विशेष प्रतिनिधिमण्डल उपस्थित था।
आयोजन के अंतर्गत राजघाट चौक, रामलीला मैदान, अजमेरी गेट चौक, कुदसिया बाग (कश्मीरी गेट), श्यामगिरि मंदिर (शास्त्री पार्क बस डिपो के पास) से लाल किले के ग्राउंड में शोभायात्रा पहुची। आयोजन को सफल एवं सुव्यवस्थित बनाने में दिल्ली पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन ने सहयोग किया। देशभर से आने वाले जनजातीय प्रतिभागियों के ठहरने के लिए  दिल्ली के 79 विभिन्न स्थानों पर आवासीय व्यवस्थाएँ की गयी थी। आयोजक समिति प्रकाश उईके, महेश भाग  चन्दका, अशोक कुमार गोंड के साथ जनजाति समाज के सैकड़ो सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Friday, 22 May 2026

पहली बार लाला किले में जनजातीय सांस्कृतिक समागम


नई दिल्ली, 22 मई। दिल्ली के लाल।किले में 24 मई रविवार को जनजातीय सांस्कृतिक समागम  आयोजित होने जारहा है। जिसकी तैयारियाँ ज़ोर-शोर से चल रही है। यह आयोजन भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित होने जा रहा है। इस आयोजन में देशभर के जनजातीय समाज की सांस्कृतिक अस्मिता, आस्था और पारंपरिक जीवन मूल्यों को राष्ट्रीय महाआयोजन के रूप में देखा जा सकता है। आयोजकों के अनुसार इस ऐतिहासिक समागम में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 1.5 लाख जनजातीय समाज के प्रतिनिधि  एवं समाजबंधुओं की सहभागिता अपेक्षित है। विशेष रूप से अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह से भी प्रतिनिधिमंडलों का आगमन सुनिश्चित हुआ है।

आयोजन के अंतर्गत दिल्ली के अलग अलग स्थानों से पाँच भव्य शोभायात्राएँ आयोजित की जाएँगी, जो इस प्रकार हैं- राजघाट चौक, रामलीला मैदान, अजमेरी गेट चौक, कुदसिया बाग (कश्मीरी गेट), श्यामगिरि मंदिर (शास्त्री पार्क बस डिपो के पास) जिनका लाल किले के ग्राउंड में समापन होगा। शोभायात्राओं के मार्गों की पहचान और अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। आयोजन को सफल एवं सुव्यवस्थित संचालन हेतु दिल्ली पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय किया जा रहा है। विभिन्न स्तरों पर नियमित समन्वय बैठकों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि कार्यक्रम का संचालन सुचारु एवं सुरक्षित रूप से संपन्न हो सके।

देशभर से आने वाले जनजातीय प्रतिभागियों के ठहरने हेतु दिल्ली के 79 विभिन्न स्थानों पर आवासीय व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई हैं। चूँकि कार्यक्रम ग्रीष्म ऋतु में आयोजित हो रहा है, इसलिए पेयजल एवं गर्मी से राहत संबंधी व्यवस्थाओं को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। लाल किला के ग्राउंड में विशाल पंडाल, बैठक व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं की तैयारियाँ भी तेजी से चल रही है।

इस जनजातीय सांस्कृतिक समागम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के यशस्वी गृह मंत्री श्री अमित शाह होंगे। आयोजकों के अनुसार इस विराट आयोजन को सफल बनाने के लिए एक विशेष समन्वय समिति लगातार कार्य कर रही है। समिति का उद्देश्य दिल्ली में पहली बार आयोजित हो रहे इस अभूतपूर्व जनजातीय सांस्कृतिक समागम को सुव्यवस्थित, गरिमामय और ऐतिहासिक बनाना है।

जनजातीय सांस्कृतिक समागम से जानजातियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा व संस्कृति मजबूत होगी : ललिता मुर्मू


डॉ. सुभाष गौतम/हिमांशु

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर दिल्ली के लाल किले में आयोजित होने वाली जनजातीय सांस्कृतिक समागम के संदर्भ में वनवासी कल्याण आश्रम, रायपुर केंद्र की अखिल भारतीय सह-महिला प्रमुख ललिता मुर्मू से विशेष बातचीत की पत्रकार डॉ. सुभाष गौतम एवं युवा पत्रकार हिमांशु

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर देशभर में जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपरा और अस्मिता को केंद्र में रखकर अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में एक विशाल जनजातीय सांस्कृतिक समागम का आयोजन किया जा रहा है जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से लाखों वनवासी बंधुओं के शामिल होने की संभावना है।

यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि जनजातीय समाज के अस्तित्व, उनकी परंपराओं और उनके संघर्षों को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का प्रयास माना जा रहा है। आज जब आधुनिकता और बाजारवाद के बीच आदिवासी समाज अपनी भाषा, संस्कृति, पूजा पद्धति और पारंपरिक जीवन मूल्यों को बचाने की चुनौती से जूझ रहा है, ऐसे समय में यह समागम एक बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक संवाद का माध्यम बनकर उभर रहा है।

इन्हीं विषयों को लेकर वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सुभाष गौतम और युवा पत्रकार हिमांशु ने वनवासी कल्याण आश्रम की अखिल भारतीय सह महिला प्रमुख ललिता जी से विस्तार से बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्होंने जनजातीय समाज की वर्तमान स्थिति, संस्कृति संरक्षण, स्वावलंबन, शिक्षा, स्वास्थ्य, धर्मांतरण और घर वापसी जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात रखी।

प्रश्न–भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित इस विशाल जनजातीय सांस्कृतिक समागम का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर–भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जन्म जयंती वर्ष चल रही है और यह केवल एक स्मृति का अवसर नहीं बल्कि पूरे जनजातीय समाज के आत्मसम्मान और जागरण का पर्व है। हमें लगा कि इस अवसर पर ऐसा कार्यक्रम होना चाहिए जो केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित न रहे बल्कि पूरे देश और विश्व तक भगवान बिरसा मुंडा जी का संदेश पहुंचाए।

हमारा उद्देश्य यह है कि देशभर में रहने वाले जनजातीय भाई-बहन एक मंच पर आएं, एक-दूसरे को समझें, अपनी संस्कृति को साझा करें और यह अनुभव करें कि वे अकेले नहीं हैं। आज तक इतना बड़ा आयोजन नहीं हो पाया था इसलिए यह समागम हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से हम यह संदेश देना चाहते हैं कि जनजातीय समाज केवल जंगलों और पहाड़ों में रहने वाला समाज नहीं है बल्कि उसकी अपनी समृद्ध संस्कृति, लोककला, संगीत, वेशभूषा, पूजा पद्धति और जीवन दर्शन है, जिसे बचाना पूरे देश की जिम्मेदारी है। 

प्रश्न–इस समागम में कितनी जनजातियों की भागीदारी रहने वाली है? महिलाओं की सहभागिता को आप किस तरह देखती हैं?

उत्तरदेश में 700 से अधिक जनजातियां हैं। सभी का आ पाना संभव नहीं है लेकिन हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक समाज इसमें शामिल हों। विशेष रूप से उन क्षेत्रों तक पहुंचने का प्रयास किया गया है जहां अब तक बहुत कम संपर्क हो पाया था।

जहां तक महिलाओं की बात है तो जनजातीय समाज में संस्कृति को बचाने और आगे बढ़ाने में बहनों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक रीति-रिवाज और परिवार की सांस्कृतिक संरचना को सबसे अधिक महिलाएं ही संभालती हैं। इसलिए इस समागम में बड़ी संख्या में जनजातीय बहनों की सहभागिता रहेगी।

हम चाहते हैं कि यह आयोजन केवल पुरुषों का कार्यक्रम न होकर पूरे समाज का उत्सव बने जिसमें युवा, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी समान रूप से सहभागी हों। 

प्रश्न–किन राज्यों से सबसे अधिक लोग इस समागम में आने वाले हैं?

उत्तरसबसे अधिक संख्या छत्तीसगढ़ से आने की संभावना है क्योंकि वहां जनजातीय समाज की बड़ी आबादी है। इसके अलावा मध्य प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड और पूर्वांचल के विभिन्न क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में वनवासी बंधु आ रहे हैं।

पूर्वोत्तर भारत से भी अलग-अलग जनजातीय समुदायों की भागीदारी होगी। खासी और अन्य कई समाजों के लोग इसमें शामिल होंगे। यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है क्योंकि अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले और अलग-अलग परंपराओं में रहने वाले लोग पहली बार इतने बड़े स्तर पर एक साथ मिलेंगे। 

प्रश्न–वनवासी कल्याण आश्रम जनजातीय क्षेत्रों में आजीविका और स्वावलंबन को लेकर किस प्रकार कार्य कर रहा है?

उत्तरहमारा सबसे बड़ा प्रयास यह है कि जनजातीय समाज आत्मनिर्भर बने और गांवों के लोग अपने ही क्षेत्र में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

गांवों में स्वयं सहायता समूह बनाए जाते हैं और महिलाओं को अलग-अलग प्रकार के रोजगार से जोड़ा जाता है। सिलाई-कढ़ाई, बकरी पालन, मुर्गी पालन, सूअर पालन, गाय पालन जैसे कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है। जहां जो संसाधन आसानी से उपलब्ध हैं उसी आधार पर लोगों को रोजगार दिया जाता है।

कहीं पत्तल बनाए जाते हैं, कहीं झाड़ू और चटाई बनाई जाती है, तो कहीं हाथ से कपड़ा बुनने का काम किया जाता है। हमारा उद्देश्य केवल रोजगार देना नहीं बल्कि लोगों में स्वाभिमान और आत्मविश्वास पैदा करना भी है। 

प्रश्न–स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में क्या प्रयास किए जा रहे हैं?

उत्तरदूरदराज के जनजातीय क्षेत्रों में सबसे बड़ी समस्या स्वास्थ्य सुविधाओं की होती है क्योंकि वहां अस्पताल और डॉक्टर आसानी से उपलब्ध नहीं होते। इसलिए स्थानीय युवाओं को प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे गांव में छोटी-मोटी चिकित्सा सहायता दे सकें।

समय-समय पर मेडिकल कैंप लगाए जाते हैं और शहरों के डॉक्टरों को गांवों तक ले जाकर लोगों का उपचार कराया जाता है। जिन लोगों की स्थिति गंभीर होती है उन्हें जिला केंद्र तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी हम बच्चों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। गांव के मेधावी बच्चों को शहरों में लाकर अच्छी शिक्षा दिलाई जाती है ताकि वे आगे चलकर अपने समाज के लिए काम कर सकें और अपने गांव के लोगों को जागरूक बना सकें। 

प्रश्न–पारंपरिक ‘गोटुल’ व्यवस्था आज किन क्षेत्रों में देखने को मिलती है?

उत्तरगोटुल परंपरा आज भी कुछ क्षेत्रों में जीवित है। कर्नाटक, बिहार के कुछ हिस्सों और छत्तीसगढ़ में यह व्यवस्था देखने को मिलती है।

गोटुल केवल रहने की जगह नहीं थी बल्कि वह जनजातीय समाज का पारंपरिक ज्ञान केंद्र था जहां बच्चे खेती, जीवन शैली, सामाजिक व्यवहार, लोक परंपराएं और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति सीखते थे। वहां सामूहिक जीवन और अनुशासन की शिक्षा दी जाती थी और संस्कृति को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जाता था। 

प्रश्न–अलग-अलग जनजातीय भाषाओं और सरकारी योजनाओं के बीच संवाद की समस्या को लेकर क्या प्रयास हो रहे हैं?

उत्तरयह बहुत बड़ी चुनौती है क्योंकि कई क्षेत्रों में अलग-अलग बोलियां हैं और लोग एक-दूसरे की भाषा भी नहीं समझ पाते। ऐसे में सरकारी योजनाएं गांव तक पहुंच तो जाती हैं लेकिन लोग उन्हें ठीक से समझ नहीं पाते।

इसीलिए स्थानीय बच्चों को शिक्षा देकर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाता है ताकि वही अपने समाज के बीच जाकर योजनाओं और अधिकारों की जानकारी दे सकें। गर्मियों में प्रशिक्षण शिविर भी लगाए जाते हैं जहां युवाओं को सामाजिक और शैक्षणिक विषयों पर प्रशिक्षित किया जाता है। 

प्रश्न–इस समागम को लेकर वनवासी समाज में किस तरह का उत्साह देखने को मिल रहा है?

उत्तरबहुत अधिक उत्साह है। कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने आज तक ट्रेन तक नहीं देखी लेकिन पहली बार दिल्ली आने वाले हैं। उनके लिए यह केवल यात्रा नहीं बल्कि अपने समाज को बड़े स्तर पर देखने और समझने का अवसर है।

सबसे बड़ी बात यह है कि वे अपनी संस्कृति को बचाने के लिए बहुत गंभीर हैं। वे चाहते हैं कि उनका पहनावा, लोकनृत्य, संगीत, वाद्य यंत्र और पूजा पद्धति सुरक्षित रहे।

उनका मानना है कि अगर संस्कृति बची रहेगी तभी उनकी पहचान भी बची रहेगी। इसलिए इस समागम को लेकर उनमें गर्व और उत्साह दोनों दिखाई देता है। 

प्रश्न–जनजातीय समाज में धर्मांतरण की समस्या को आप किस रूप में देखती हैं?

उत्तरधर्मांतरण की समस्या आज की नहीं है बल्कि भगवान बिरसा मुंडा जी के समय से ही यह संघर्ष चलता आ रहा है। गांवों में जाकर ही पता चलता है कि कहां क्या हो रहा है।

जब लोग अपनी पारंपरिक पूजा-पद्धति से दूर होने लगते हैं तब समाज को धीरे-धीरे इसका एहसास होता है। कई बार लोग बीमारी, शिक्षा या आर्थिक लालच के कारण धर्मांतरण की ओर चले जाते हैं।

भगवान बिरसा मुंडा जी भी लोगों से कहते थे कि अपने स्वधर्म और परंपराओं को बचाकर रखें। आज भी वही संघर्ष जारी है। हम लोगों को समझाने का प्रयास करते हैं कि अपनी जड़ों और पूर्वजों से जुड़े रहना कितना आवश्यक है। 

प्रश्न–क्या घर वापसी की घटनाएं भी सामने आती हैं?

उत्तरहां, कई लोग बाद में यह महसूस करते हैं कि धर्म बदलने के बाद भी जीवन की कठिनाइयां वैसी ही रहती हैं और वे अपने समाज से कट जाते हैं। तब वे वापस अपने समाज में लौटना चाहते हैं।

गांव के लोग और समाज के प्रमुख ऐसे लोगों को दोबारा स्वीकार भी करते हैं। हमारा मानना है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी परंपराओं और समाज में वापस लौटना चाहता है तो उसके लिए रास्ता खुला रहना चाहिए। 

प्रश्न–क्या यह समागम जनजातीय समाज के लिए कोई नया रास्ता खोल सकता है?

उत्तरबिल्कुल।अभी तक बहुत से लोग अलग-अलग जगहों पर बिखरे हुए थे और कई बातें भूल चुके थे। लेकिन जब इतने बड़े स्तर पर लोग एक साथ आएंगे तो उन्हें एहसास होगा कि वे अकेले नहीं हैं।

इससे समाज में आत्मविश्वास बढ़ेगा और लोग अपनी संस्कृति को दोबारा मजबूती से अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। जो बातें लोग भूल चुके हैं उन्हें फिर से याद करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। यही इस समागम की सबसे बड़ी सफलता होगी।

Wednesday, 13 May 2026

नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में एनटीए मुख्यालय पर अभाविप कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन


नई दिल्ली, 13 मई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दिल्ली ने नीट-यूजी परीक्षा में सामने आए पेपर लीक प्रकरण, परीक्षा प्रक्रिया में लगातार उजागर हो रही अनियमितताओं तथा विद्यार्थियों के भविष्य के साथ हो रहे गंभीर खिलवाड़ के विरुद्ध दिल्ली स्थित नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) मुख्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे अभाविप कार्यकर्ताओं एवं विद्यार्थियों पर दिल्ली पुलिस द्वारा बल प्रयोग करते हुए उन्हें हिरासत में लिया गया।

अभाविप का यह मत है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियाँ देशभर के लाखों विद्यार्थियों के परिश्रम, विश्वास और भविष्य पर सीधा आघात हैं। नीट-यूजी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में पेपर लीक की घटना केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, अपितु संपूर्ण परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। वर्षों की कठिन तैयारी और अथक परिश्रम के बाद परीक्षा में सम्मिलित होने वाले विद्यार्थियों के साथ इस प्रकार का अन्याय किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से कराई जाए तथा जांच से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि इस पूरे नेक्सस को सामने लाकर ध्वस्त किया जा सके और देशभर के विद्यार्थियों का विश्वास पुनः स्थापित हो। परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं का संचालन अस्थायी एवं आउटसोर्स आधारित व्यवस्था के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। प्रिंटिंग, परीक्षा केंद्र प्रबंधन तथा स्टाफिंग जैसी संवेदनशील जिम्मेदारियों को निजी एजेंसियों को सौंपना गंभीर सुरक्षा संकट को जन्म देता है और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति की आशंका बढ़ाता है।

अभाविप दिल्ली प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इतने गंभीर मुद्दे पर जवाबदेही तय करने के बजाय छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हमेशा ही छात्र हित में खड़ी है और जब तक नीट यूजी पेपर लीक के वजह से प्रभावित 22 लाख अभ्यर्थियों को न्याय नहीं मिल जाता तब तक विद्यार्थी परिषद उनके अधिकारों के लिए लड़ती रहेगी।  एक राष्ट्रीय एजेंसी होने के बावजूद भी आज तक एनटीए निजी कंपनियों पर आश्रित है यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अभाविप प्रशासन से माँग करती है कि इस प्रकरण का निष्पक्ष जांच किया जाए तथा दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो।

Tuesday, 12 May 2026

परीक्षा की पारदर्शिता तथा शुचिता भंग कर रहे शिक्षा माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो: अभाविप


नई दिल्ली, 12 मई। नीट-यूजी 2026 परीक्षा में सामने आए कथित पेपर लीक एवं अनियमितताओं के प्रकरण की जांच केंद्र सरकार द्वारा सीबीआई को सौंपना एक उचित एवं आवश्यक कदम है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद प्रारंभ से ही इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रही थी। सीबीआई जांच के दौरान जो भी साक्ष्य, नेटवर्क एवं दोषी व्यक्ति सामने आएं, उनकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि वर्षों से राष्ट्रीय परीक्षाओं में सक्रिय शिक्षा-माफिया एवं भ्रष्ट तंत्र का पूर्ण रूप से भंडाफोड़ हो सके। देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी भी स्तर पर संरक्षण नहीं मिलना चाहिए तथा सभी दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

लगातार विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं में सामने आ रही गड़बड़ियां राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। वर्षभर कठिन परिश्रम करने वाले विद्यार्थियों के साथ बार-बार इस प्रकार की घटनाएं होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं विश्वासघातपूर्ण है। नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए एनटीए के महानिदेशक को तत्काल अपने पद से त्यागपत्र देना चाहिए। साथ ही, ऐसी संस्थागत विफलताओं को देखते हुए एनटीए की भूमिका एवं संरचना की व्यापक समीक्षा आवश्यक है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद स्पष्ट रूप से मानती है कि विद्यार्थियों के हित, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था एवं दोषियों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई हेतु इस पूरे नेक्सस को ध्वस्त करना अनिवार्य है, विद्यार्थी परिषद इस संघर्ष में देशभर के विद्यार्थियों के साथ निरंतर खड़ी रहेगी।

Monday, 11 May 2026

कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत है यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व: दत्तात्रेय होसबाले

करुणा नयन चतुर्वेदी/प्रेम कुमार 


छात्र कल्याण न्यास एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दिल्ली प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में अभाविप के संगठन शिल्पी प्रा. यशवंतराव केलकर जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य पर प्रिय केलकर जी विषय पर विशेष अभिवाचन प्रस्तुति कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली स्थित सिविक सेंटर के केदारनाथ साहनी सभागार में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संग के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट स्थिति के रूप में फिर भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रा. रघुराज किशोर तिवारी और पूर्व अध्यक्ष प्रा. राजकुमार भाटिया उपस्थित रहे। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय जनता पार्टी के विभिन्न पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। 

अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज किशोर तिवारी ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की व्यक्ति निर्माण की प्रक्रिया को पूरे राष्ट्र में समर्थन प्राप्त है जिसके प्रणेता यशवंतराव केलकर जी थे। इसके विकासक्रम में यशवंतराव की महत्ती भूमिका थी। उन्होंने कहा कि स्वयं को पीछे रखकर युवा शक्ति को आगे बढ़ाने की संकल्पना यशवंतराव के विचार से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में आया है। यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व काफी विराट था। उनसे जब भी कोई मिलता तो कुछ ना कुछ सीखता ही था। यशवंतराव केलकर अपने कार्य पद्धति से कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय थे और वह प्रत्येक कार्यकर्ताओं को मौका देते थे। उन्हें आगे बढ़ाने में उनकी मदद करते थे। वह कहते थे कि शरीर को डिटॉक्स करने से पहले मन को डिटॉक्स करने की जरूरत है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की एक परंपरा में एक परवाह की जो स्थापना उन्होंने कि वह आज भी कायम है। रघुराज किशोर कहा कि वर्तमान पीढ़ी को यह कार्य पद्धति यशवंतराव से ही विरासत में मिली है। यशवंतराव केलकर से प्राप्त प्रेरणा बिंदुओं से पुराने और वर्तमान को अवगत कराया जाना चाहिए ताकि कार्यकर्ताओं को एक साथ जोड़ने का काम संभव हो सके। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से निकलकर  व्यक्ति अपने जीवन क्षेत्र में जहां भी जाते हैं, वहीं अपना सर्वस्व देते हैं। 

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार भाटिया में कहा कि यदि कोई सचमुच में यशवंत राव केलकर के जीवन वृतांत को जानना चाहता है तो पहले उन्हें पढ़ें। उनके कार्य पद्धति को सीखने से पहले उनके ऊपर आधारित लेखों और पुस्तकों से होकर गुजरना चाहिए। तभी आप यशवंत राव केलकर के विराट व्यक्तित्व को जान सकेंगे। भाटिया ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में एक खास पद्धति को विकसित करने में यशवंतराव केलकर की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि यशवंतराव खेलकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन शिल्पी थे।वह भले ही इसके संस्थापक ना रहे हों लेकिन उन्होंने इस संगठन को नई रूप में ढालने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई  वह कहते थे कि विद्यार्थी परिषद से मिले दृष्टिकोण को जीवन में जीने के लिए प्रयोग करना चाहिए । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद केवल विद्यार्थियों के लिए कार्य नहीं करती बल्कि यह एक ऐसी भावी नागरिक को तैयार करने की फैक्ट्री है जो भविष्य में जिस भी जगह रहेंगे वहां पर ही भारतीयता को प्रमुखता से रखते हुए जीवन का निर्वाह करेंगे। उनका मानना था कि कार्यकर्ता जीवन के जिस क्षेत्र में भी जाएगा वहीं अपना मुकाम हासिल कर लेगा। यशवंतराव केलकर कार्यकर्ताओं में विश्वास रखते थे। वह मनुष्य को गुण दोष के आधार पर नहीं नापते थे। उनका मत था कि कार्यकर्ताओं को गुण दोष के सहित स्वीकार करना चाहिए और उसके  सकारात्मक पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए। केलकर ऐसे महान पुरुष थे जिन्हें जितना पढ़ा जाएगा उतना जाना जाएगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने अपने उद्बोधन में कहा कि आजकल के कार्यकर्ताओं को अभ्यास वर्ग में जो भाव प्रदर्शित किए जाते हैं वह यशवंतराव केलकर की देन है। यशवंतराव केलकर के जन्म शताब्दी वर्ष में यह आयोजन काफी पुरानी यादों को ताजा कर रहा है। यशवंतराव केलकर को पुनः मानस पटल पर लाने का यह स्वर्णिम अवसर आज हम सभी को मिला है। उन्होंने कहा कि यशवंतराव केलकर के बारे में जितना कहा जाए उतना कम है । यशवंतराव केलकर ही पहले व्यक्ति थे जो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में महिला सहभागिता, छात्र उपयोगिता के बिंदुओं पर कार्य करने के लिए आगे आए। उनका जीवन तमाम कार्यकर्ताओं के लिए आदर्श का प्रतिमान है। दत्तात्रेय होसबाले ने बताया कि छात्र आंदोलन के सिद्धांत को कैसे कार्य करना चाहिए यह यशवंतराव केलकर के व्यक्तित्व से पता चलता है। वह अपने विद्यार्थियों में विश्वास रखते थे। वह अपने व्यक्तिगत जीवन में लोगों को अनुभव करने के लिए छोटी-छोटी यात्राएं करते थे। वह कभी भी अपने विद्यार्थियों को ही दृष्टि से नहीं देखते थे। उनका मानना था कि विद्यार्थी कभी भी छोटा या बड़ा नहीं होता। उनका अपना यह तर्क था कि व्यक्ति को अपना कार्य स्वयं करना चाहिए ना कि उसे दूसरों पर थोपना चाहिए। वह कहते थे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से प्राप्त गुण को लेकर कार्यकर्ता जब सामाजिक जीवन और राजनीतिक जीवन में जाकर के रूप में रहेंगे तो वह समाज के उत्थान के लिए अपनी आहुति देंगे। उनका चरित्र काफी विराट है और उन्हें समझाने के लिए अध्ययन चिंतन और मनन की आवश्यकता है।

कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती यशवंत राव केलकर और विवेकानंद की प्रतिमा के समक्ष दीपक शंकर के हुआ। अतिथियों का स्वागत स्मृति चिन्ह लेकर किया गया। इस अवसर पर मिलिंद भंगी ने अपने मराठी से हिंदी में रूपांतरित यशवंत राव केलकर के ऊपर अभिवाचन प्रस्तुति प्रदर्शित की  इस प्रस्तुति के अंदर यशवंतराव केलकर के जीवन वृतांत को बेहद सुंदर और आकर्षक ढंग से सैंड आर्ट के जरिए दिखाया गया है। अभाविप दिल्ली के प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का मंच संचालन मित्रविंदा करनवाल ने किया।

जनजाति सांस्कृतिक समागम को संबोधित करेंगे गृह मंत्री अमित शाह


नई दिल्ली, 11 मई। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में जनजाति सांस्कृतिक समागम की औपचारिक घोषणा की गयी। समागम आगामी 24 मई को महान जननायक भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में नई दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन के मुख्य अतिथि भाजपा के वरिष्ठ नेता व भारत सरकार में गृह मंत्री अमित शाह होंगे।  प्रेस वार्ता में बताया की भगवान बिरसा मुंडा भारत में स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अस्मिता और सामुदायिक चेतना के प्रतीक रहे हैं।

यह समागम अपने आपमें अनोखा है। इस में देशभर की 500 से अधिक जनजातियों के डेढ़ लाख प्रतिभागियों की उपस्थिति संभावित है। आयोजन में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागी अपने स्वयं के खर्च से दिल्ली आने वाले है। अपने आप में यह बड़ा सांस्कृतिक आयोजन होगा। अपनी धर्म-संस्कृति, परम्परा के विषय को लेकर जनजाति समाज राजधानी दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में पहली बार एकत्रित हो रहा है। 

भव्य सांस्कृतिक शोभा यात्रा यह कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेगा। अपनी पारंपरिक वेशभूषा में देश से विभिन्न हिस्सों से आए जनजति महिला-पुरुष इस शोभायात्रा में सम्मिलित होकर संस्कृति-परम्परा का दर्शन दिल्ली वासियों को कराएँगे। यह शोभा यात्रा पाँच विभिन्न स्थलों से प्रारंभ होगी, जो जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करेगी। ये यात्राएँ लाल किले पर आकर एकत्रित होंगी, जहाँ इसके पश्चात एक जनसभा का आयोजन किया गया है। भारत सरकार में गृहमंत्री अमित शाह इस आयोजन को संबोधित करेंगे। तू मैं एक रक्त, वनवासी, ग्रामवासी, नगरवासी, हम सब भारतवासी इस समागम का मुख्य विचार सूत्र रहेगा।

इस समागम के प्रमुख उद्देश्य गवान बिरसा मुंडा की विरासत को याद करना, जनजतियों की समृद्ध सांस्कृतिक एवं गौरवशाली परंपरा का स्मरण करना, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और संवाद के लिए एक राष्ट्रीय मंच तैयार करना तथा  सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करना है। 

इस समागम में पहली बार दूर-दराज क्षेत्र से वनवासी बंधुओं दिल्ली आरहे हैं।आयोजन में 20 विभाग बनाएं है और विभिन्न समितियों का गठन किया है। दिल्ली के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों पर आवास, भोजन-पानी, यातायात, चिकित्सा, सुरक्षा और स्वच्छता की व्यवस्था की है।

यह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ आने का महत्वपूर्ण अवसर है। दिल्ली में होनेवाला यह सांस्कृतिक समागम ‘तू-मैं, एक रक्त’ इस राष्ट्रीय भाव को अधिक दृढ़ करेगा।