Sunday, 1 February 2026

Inauguration of the 61st State Conference of ABVP Delhi Held in Rohini


New Delhi, 31 January, The two-day 61st State Conference of Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP), Delhi  commenced with grandeur and solemnity at Sri Guru Tegh Bahadur Nagar, set up in the campus of Keshav Mahavidyalaya under the Rohini Vibhag. The conference began with the inauguration of an exhibition dedicated to the memory of late Madan Bhatia Ji, former State Organising Secretary of ABVP Delhi.

The exhibition showcased Delhi’s rich cultural heritage, inspiring lives of national leaders, immortal sacrifices of freedom fighters, and contemporary national issues. Special sections highlighting the valour and bravery of the Indian Armed Forces and the courage, commitment, and nationalism of women were major attractions, deeply inspiring students and delegates alike.


As part of the conference proceedings, the State Secretary’s Report was presented by State Secretary Sarthak Sharma, detailing the year-long organisational, creative, and movement-based initiatives of ABVP Delhi. He informed that during the year, ABVP Delhi enrolled over 54,000 student members and successfully constituted 137 city units and 93 college units, marking a historic milestone in organisational expansion.

The inaugural session of the 61st State Conference was graced by Padma Shri Prof. Chamu Krishna Shastri, Chairman of the Bharatiya Bhasha Samiti, as the Chief Guest, and Ashish Chauhan, National Organising Secretary of ABVP, as the Guest of Honour. The occasion also witnessed the presence of Ved Prakash Tandon, Chairman of the Reception Committee, Rakesh Gupta, General Secretary of the Reception Committee, and several other distinguished dignitaries.

Addressing the gathering, PadmaShri Chamu Krishna Shastri stated, “We are all like a pen. When we remain in the hands of a strong organisation, we can contribute meaningful and nation-oriented writing.
ABVP workers embody a harmonious blend of capacity for action, knowledge, and willpower. When this confluence manifests in a karyakarta’s personality, they become a foundation stone for social reconstruction. ABVP reflects purity like the Ganga, imbued with an unwavering spirit of national service, inspiring youth to become responsible and principled citizens.”

National Organising Secretary Ashish Chauhan, in his address, highlighted that ABVP has launched innovative campaigns such as ‘Screen Time to Green Time’ and ‘Play Time’ to guide youth towards a positive and balanced lifestyle. He emphasized the importance of reconnecting young people with nature, sports, and social life, and urged students to take responsibility for spreading the ‘Panch Parivartan’ vision of the Rashtriya Swayamsevak Sangh across educational campuses.

Speaking on the occasion, re-elected State Secretary of ABVP Delhi, Sarthak Sharma, said,“At a time when youth in several countries are being viewed through fragmented and negative perspectives, India’s youth stands united with organisations like ABVP that uphold the idea of Nation First and are moving forward towards a Developed India. This State Conference will play a significant role in motivating student power towards nation-building through various ideological, academic, and organisational sessions, while also providing direction for the expansion and strengthening of the organisation.”

अभाविप ने किया वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट स्वागत


नई दिल्ली,  1 फरवरी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद वित्त वर्ष 2026–27 के केंद्रीय बजट का स्वागत करती है। इस बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, रोजगार और युवाओं की सहभागिता को केंद्र में रखते हुए किए गए प्रावधान देश की सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप हैं। विशेष रूप से शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्रों में बजट आवंटन में निरंतर वृद्धि इन क्षेत्रों को सुदृढ़ करने की दिशा में सकारात्मक कदम है।

केंद्रीय बजट 2026–27 में शिक्षा क्षेत्र के लिए ₹1,39,389 करोड़ तथा स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए ₹1,04,599 करोड़ का प्रावधान किया गया है। पिछले वर्षों की तुलना में यह बढ़ोतरी न केवल अवसंरचना विस्तार में सहायक होगी, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को व्यापक बनाने में भी सहायक सिद्ध होगी।

अभाविप, बजट में विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा और शोध से जुड़े प्रावधानों को महत्त्वपूर्ण मानती है। विद्यालयी शिक्षा एवं साक्षरता मद में 2026–27 के लिए ₹83,562 करोड़ तथा उच्च शिक्षा के लिए ₹55,727 करोड़ का आवंटन किया गया है, जो विगत वर्षों की तुलना में वृद्धि को दर्शाता है। समग्र शिक्षा, पीएम-श्री, पीएम-उषा जैसी योजनाओं के लिए किए गए प्रावधानों से शिक्षा की गुणवत्ता, समान अवसर और संस्थागत क्षमता को बल मिलेगा। प्रत्येक जिले में छात्राओं के लिए छात्रावास स्थापित करने का निर्णय उच्च शिक्षा में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में उपयोगी सिद्ध होगा।

बजट में ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यम’ पर केंद्रित उच्चस्तरीय स्टैंडिंग कमेटी के गठन का प्रस्ताव युवाओं की रोजगारोन्मुखी तैयारी को संस्थागत आधार प्रदान करता है। इसके साथ ही औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक कॉरिडोर के निकट पाँच यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित करने का निर्णय शिक्षा-उद्योग समन्वय को सुदृढ़ करेगा। एवीजीसी (एनिमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) क्षेत्र के लिए विद्यालयों और महाविद्यालयों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स की स्थापना से नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे।

अभाविप युवाओं के लिए इंटर्नशिप और कौशल से जुड़े प्रावधानों को भी महत्त्वपूर्ण मानती है। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के अंतर्गत युवाओं को देश की अग्रणी कंपनियों में अवसर उपलब्ध कराने का उद्देश्य रोजगार-तैयारी को व्यावहारिक आधार देगा। इसके अतिरिक्त, पीएम-यशस्वी, अनुसूचित जाति पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति और अन्य छात्रवृत्ति योजनाओं में बढ़ा हुआ आवंटन सामाजिक न्याय और शैक्षिक समावेशन को सुदृढ़ करता है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट 2026-27 के अंतर्गत चिकित्सा शिक्षा एवं मानव संसाधन के लिए बढ़ा हुआ प्रावधान तथा स्वास्थ्य अवसंरचना के उन्नयन जैसे कदम स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सहायक हैं। चिकित्सा शिक्षा के लिए आवंटन में वृद्धि से प्रशिक्षित स्वास्थ्य-कर्मियों की उपलब्धता बढ़ेगी।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा,“वित्त वर्ष 2026–27 का केंद्रीय बजट शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं की क्षमता-निर्मिति को केंद्र में रखते हुए सर्वस्पर्शी है। शिक्षा क्षेत्र के बजट आवंटन में निरंतर वृद्धि, रोजगारोन्मुखी पहलें और स्वास्थ्य अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण से देश की दीर्घकालिक आवश्यकताओं को संबोधित करने का प्रयास दिखाई देता है। इन प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को धरातल पर साकार करने में सहायक होगा।

Sunday, 18 January 2026

अम्बेडकर कॉलेज में राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन


नई दिल्ली, 17 जनवरी। डॉ भीम राव अम्बेडकर कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में मनोहर लाल तथा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के तरुण कुमार उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि अम्बेडकर कॉलेज के प्राचार्य सदानंद प्रसाद तथा ज्योति नगर के पुलिस अधिकारी वेद प्रकाश जी उपस्थित थे। 

मुख्य वक्ता ने विवेकानंद के जीवन की विशेषता बताते हुए 1893 शिकागो धर्म संसद में विवेकानंद का भारत के प्रतिनिधित्व तथा उनके के विचारों को बताते हुए कहा की आज के युवाओं को चरित्रवान बनाना चाहिए और समाज को एक अच्छे दिशा की ओर ले जाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने विवेकानंद द्वारा श्रीमद्भागवत गीता को सभी धर्मों का आधार बताए जाने को लेकर विस्तार से बताया। युवाओं से आग्रह किया की गुरुओं का जितना सम्मान करेंगे आपका ज्ञान उतना ही बढ़ेगा तथा अपने लक्ष्य के प्रति सदैव तात्पर्य रहो। उन्होंने ने कहा की लार्ड मैकाले ने भारत पर राज करने के लिए भारत की संस्कृति, गुरुकुल और परंपराएं नष्ट किया, परन्तु भारत की संस्कृति इतना व्याप्त और विशाल है कि उसे समाप्त करना संभव नहीं है। लेकिन इसे संरक्षित करने में आज के युवाओं को पूर्ण योगदान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी कहते थे कि स्वामी विवेकानंद जी को पढ़ने के बाद भारत के प्रति मेरी देशभक्ति की भावना बढ़ गई।  

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के तरुण कुमार ने युवाओं को संबोधित में कहा की स्वामी जी के विचारों से हमे अध्यात्म और त्याग की भावना की सिख मिलती है। स्वामी विवेकानंद जी की 150वीं जयंती के अवसर पर विश्व विख्यात वाक्य जिनके ओजस्वी वचनों से गूंज उठा था विश्व गगन। वही प्रेरणा पुंज हमारे, स्वामी पूज्य विवेकानंद।। संदर्भित कर युवाओं को स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित करता है। कार्यक्रम के अंत में संचालन समिति ने अतिथियों, वक्ताओं तथा वहां उपस्थित विद्यार्थियों का धन्यवाद किया।

रंगकर्मी जयंत राभा के निर्देशन में प्रेमचंद की लड़कियाँ का मंचन

दीपा कुमारी    


नई दिल्ली, 18 जनवरी। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय संस्कार रंग टोली  द्वारा आयोजित संडे क्लब के कलाकारों द्वारा कलरव थिएटर फेस्टिवल के अंतर्गत  प्रेमचंद की लड़कियाँ नाटक का शानदार मंचन किया गया। मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानियों पर आधारित यह नाटक दर्शकों के लिए सामाजिक विमर्श और कला का एक अनूठा संगम साबित हुआ।

अभिमंच सभागार में आयोजित इस नाटक के मंचन किए गए। यह नाटक प्रेमचंद की चार चुनिंदा कहानी बड़े घर की बेटी, कफन, दूध के दाम और कायर पर आधारित है। असिस्टेंट डायरेक्टर और एडाप्टेसन अमित के. कुशवाहा ने इन स्वतंत्र कहानियों को एक सूत्र में पिरोते हुए बताया कि चुनौती कहानियों के 'इमोशनल थ्रेड' को पकड़ने की थी। मंच पर एक कहानी के पात्र दूसरी कहानी के पात्र से संवाद करती है, जिससे एक डायलॉजिक रेजोनेंस या संवादात्मक प्रतिध्वनि पैदा होती है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती है।

युवा ऊर्जा और निर्देशन की बारीकियां निर्देशक जयंत राभा  ने किशोर आयु के युवाओं के साथ काम करते हुए एक अद्भुत प्रयोग किया है। जयंत राभा, जिन्होंने पहले द कैनवास अ फील्ड ऑफ क्रिएटिविटी के माध्यम से बच्चों के साथ काम किया है, ने यहाँ भी युवाओं की ऊर्जा को प्रेमचंद के गंभीर विषयों के साथ जोड़ा है। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया केवल अभिनय सीखने की नहीं, बल्कि समाज की उन कड़वी सच्चाइयों को समझने लाने की थी जो आज भी गाँवों और छोटे शहरों में विद्यमान हैं। कला और संगीत का जादुई संयोजन

नाटक की सफलता में इसके तकनीकी पक्ष का बड़ा योगदान रहा। संगीत निर्देशन  मंडी हाउस द बैंड के संस्थापक और संगीतकार देवेन्द्र अहिरवार के निर्देशन में कबीर खान, खुशी खान और ज़ारा खान की आवाज़ों ने माहौल को जीवंत बनाया। सेट और प्रशिक्षण रंगकर्मी परमानंद द्वारा तैयार सेट डिज़ाइन ने दर्शकों को सीधे प्रेमचंद के कालखंड में पहुँचा दिया। वहीं, राकेश कुमार की कोरियोग्राफी और सारस कुमार की लाइट डिज़ाइन ने दृश्य भाषा को और अधिक गहरा बनाया। वेशभूषा सुप्रसिद्ध संस्कृतिकर्मी सावित्री मिश्रा द्वारा डिज़ाइन की गई वेशभूषा ने पात्रों के सामाजिक परिवेश को पूरी प्रमाणिकता के साथ प्रदर्शित किया।

मंच पर प्रतिभा का प्रदर्शन नाटक में सायना खन्ना ,मान्या मल्होत्रा, यशिका, वंशिका रानी, और अनन्य सिंह, कनिष्क शर्मा ने अपने अभिनय से दर्शकों को भावुक कर दिया। पृथ्वी वर्मा ने माधव और श्रीकंठ की भूमिकाओं को कुशलता से निभाया, जबकि चैतन्य ने घीसू के चरित्र में जान फूँक दी। नाटक का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को केवल लचीलापन के प्रतीक के रूप में ही नहीं, बल्कि एक ऐसी शक्ति के रूप में दिखाया जिनका मौन भी विद्रोह की एक आवाज़ है। पितृसत्तात्मक समाज के पाखंड, वर्ग भेद और मानवीय संवेदनाओं के पतन को यह नाटक बखूबी उजागर करता है। इस नाटक का प्रोडक्स्न नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के निदेशक श्री चितरंजन त्रिपाठी, रजिस्ट्रार श्री प्रदीप कुमार मोहंती और टी.आई.ई. चीफ रिकन नगोमले के मार्गदर्शन में सफलता मिली।

Friday, 19 December 2025

दिल्ली विश्वविद्यालय में परीक्षाओं के दौरान हुई अनियमितताओं के विरोध में अभाविप का प्रदर्शन


नई दिल्ली, 19 दिसम्बर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय में हाल ही में आयोजित सेमेस्टर परीक्षाओं में हुई गंभीर अनियमितताओं के विरोध में एक विशाल प्रदर्शन किया। इस दौरान अभाविप ने विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपते हुए इन अनियमितताओं को तत्काल दूर करने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।

ज्ञात हो कि हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित सेमेस्टर परीक्षाओं के दौरान अनेक प्रकार की समस्याएँ सामने आईं। कई परीक्षा केंद्रों पर समय से प्रश्नपत्र उपलब्ध नहीं कराए गए, मार्किंग स्कीम को लेकर भ्रम की स्थिति रही, भाषा संबंधी त्रुटियाँ पाई गईं तथा कई प्रश्नपत्रों में गलत प्रश्न भी पूछे गए। इन गंभीर खामियों के कारण छात्रों को भारी मानसिक तनाव और असुविधा का सामना करना पड़ा।

अभाविप ने इन समस्याओं को लेकर परीक्षा के दौरान भी विरोध दर्ज कराया था तथा आज पुनः प्रदर्शन कर कुलपति को ज्ञापन सौंपते हुए परीक्षा व्यवस्था में सुधार, छात्रों के हितों की रक्षा और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। अभाविप ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि छात्रों के साथ हुए अन्याय का तत्काल समाधान किया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

अभाविप दिल्ली के प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में से एक है, लेकिन परीक्षाओं में बार-बार हो रही लापरवाही छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। समय पर प्रश्नपत्र न मिलना, गलत प्रश्न और अस्पष्ट मूल्यांकन व्यवस्था विश्वविद्यालय प्रशासन की गंभीर विफलता को दर्शाती है। अभाविप छात्रों के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी और जब तक इन अनियमितताओं का स्थायी समाधान नहीं होता।

सीमापुरी विद्यालय में लैंगिक समानता पर कार्यशाला आयोजित


नई दिल्ली, 19 दिसम्बर। राजकीय बाल उच्च माध्यमिक विद्यालय पुरानी सीमापुरी और शिक्षा निदेशालय दिल्ली सरकार के तत्वधान में लैंगिक समानता पर कार्यशाला आयोजित हुई। इस मौके पर सोनाली भारद्वाज ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए लैंगिक समानता की जरूरत पर विस्तार से बताया। भारद्वाज ने छात्रों को जेंडर समानता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, सहानुभूति एवं मानसिक कल्याण पर मूल्यवान जानकारी प्रदान की।

इस अवसर पर प्रधानाचार्य देवेंद्र कुमार ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होते हैं तथा जेंडर समानता और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता से सशक्त समाज का निर्माण होता है। संदीप कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए रिसोर्स पर्सन को सम्मान प्रदान किया तथा विद्यालय परिवार की ओर से आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में नींव परियोजना के इंचार्ज राजेश कुमार, लाखन सिंह, आदिल आदि शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

Tuesday, 16 December 2025

अभाविप के प्रतिनिधिमंडल ने तीन मंत्रालयों में सौंपा ज्ञापन


नई दिल्ली, 16 दिसम्बर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी के नेतृत्व में अभाविप के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आज नई दिल्ली में तीन केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर देश के महत्वपूर्ण विषयों पर ज्ञापन सौंपे हैं। अभाविप प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी, केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान तथा केंद्रीय युवा एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया से भेंट कर क्रमशः महिला सुरक्षा व स्वावलंबन, कृषि शिक्षा में सुधार और खेल नीतियों के सुदृढ़ीकरण हेतु महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए हैं।

अभाविप ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को सौंपे ज्ञापन में महिलाओं के विरुद्ध हो रहे साइबर अपराधों व एआई (AI) जनित आपत्तिजनक सामग्री पर रोक लगाने, किशोरियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियंत्रण और गणित (STEM) व नई तकनीकों में प्रोत्साहित करने, सर्वाइकल व ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारियों के प्रति जागरूकता अभियान चलाने तथा महिला अपराधों के शीघ्र निपटारे हेतु फास्ट ट्रैक कोर्ट्स की संख्या बढ़ाने की मांग की है। साथ ही, कार्यस्थलों पर आंतरिक शिकायत समितियों को सक्रिय करने और आर्थिक स्वावलंबन हेतु महिला समृद्धि योजना के विस्तार पर जोर दिया गया है।

कृषि क्षेत्र में सुधार हेतु अभाविप द्वारा प्रस्तुत मांगपत्र में राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कृषि परिषद के गठन, प्रत्येक राज्य में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, कृषि शिक्षा का ICAR मानकों के अनुरूप सख्त नियमन, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों व कृषि विज्ञान केंद्रों का सुदृढ़ीकरण, रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, कृषि अनुसंधान व छात्र फेलोशिप बजट में वृद्धि, भारतीय भाषाओं में कृषि पाठ्यक्रम, NEP 2020 के अंतर्गत स्कूली कृषि शिक्षा, तथा कृषि आधारित उद्यमिता, नवाचार एवं तकनीकी प्रदर्शनी को बढ़ावा देने जैसी प्रमुख मांगे सम्मिलित हैं।

खेल एवं युवा मंत्रालय को दिए गए ज्ञापन में अभाविप ने लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा में शारीरिक शिक्षा को वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल करने, शिक्षण संस्थानों में खेल कोटा व अनिवार्य फिटनेस प्रोग्राम लागू करने और 2030 राष्ट्रमंडल खेलों हेतु 'नेशनल स्पोर्ट्स रेडिनेस फ्रेमवर्क' तैयार करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, एनसीसी और एनएसएस के छात्रों को प्रोत्साहन देने तथा पारंपरिक भारतीय खेलों को बढ़ावा देने का विषय भी प्रमुखता से उठाया गया है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि अभाविप प्रतिनिधिमंडल द्वारा देहरादून राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित किए गए प्रस्तावों एवं प्राप्त सुझावों को संकलित करते हुए संदर्भित विषयों के समाधान हेतु तीन केंद्रीय मंत्रियों को आज ज्ञापन सौंपा गया है। आज हमने तीन प्रमुख मंत्रालयों के समक्ष महिला सुरक्षा, कृषि शिक्षा और खेल जगत संबंधी समस्याओं से अवगत कराते हुए उनके व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए हैं। महिलाओं के लिए सुरक्षित डिजिटल परिवेश, कृषि शिक्षा में एकरूपता के लिए राष्ट्रीय परिषद का गठन और खेल को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाना विकसित भारत की संकल्पना के लिए आवश्यक है। माननीय मंत्रियों ने इन विषयों पर सकारात्मक रुख दिखाया है और हमें विश्वास है कि इन सुझावों पर शीघ्र ही प्रभावी नीतिगत निर्णय लिए जाएंगे।