Monday, 11 May 2026

कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत है यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व: दत्तात्रेय होसबाले

करुणा नयन चतुर्वेदी/प्रेम कुमार 


छात्र कल्याण न्यास एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दिल्ली प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में अभाविप के संगठन शिल्पी प्रा. यशवंतराव केलकर जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य पर प्रिय केलकर जी विषय पर विशेष अभिवाचन प्रस्तुति कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली स्थित सिविक सेंटर के केदारनाथ साहनी सभागार में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संग के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट स्थिति के रूप में फिर भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रा. रघुराज किशोर तिवारी और पूर्व अध्यक्ष प्रा. राजकुमार भाटिया उपस्थित रहे। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय जनता पार्टी के विभिन्न पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। 

अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज किशोर तिवारी ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की व्यक्ति निर्माण की प्रक्रिया को पूरे राष्ट्र में समर्थन प्राप्त है जिसके प्रणेता यशवंतराव केलकर जी थे। इसके विकासक्रम में यशवंतराव की महत्ती भूमिका थी। उन्होंने कहा कि स्वयं को पीछे रखकर युवा शक्ति को आगे बढ़ाने की संकल्पना यशवंतराव के विचार से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में आया है। यशवंतराव केलकर का व्यक्तित्व काफी विराट था। उनसे जब भी कोई मिलता तो कुछ ना कुछ सीखता ही था। यशवंतराव केलकर अपने कार्य पद्धति से कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय थे और वह प्रत्येक कार्यकर्ताओं को मौका देते थे। उन्हें आगे बढ़ाने में उनकी मदद करते थे। वह कहते थे कि शरीर को डिटॉक्स करने से पहले मन को डिटॉक्स करने की जरूरत है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की एक परंपरा में एक परवाह की जो स्थापना उन्होंने कि वह आज भी कायम है। रघुराज किशोर कहा कि वर्तमान पीढ़ी को यह कार्य पद्धति यशवंतराव से ही विरासत में मिली है। यशवंतराव केलकर से प्राप्त प्रेरणा बिंदुओं से पुराने और वर्तमान को अवगत कराया जाना चाहिए ताकि कार्यकर्ताओं को एक साथ जोड़ने का काम संभव हो सके। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से निकलकर  व्यक्ति अपने जीवन क्षेत्र में जहां भी जाते हैं, वहीं अपना सर्वस्व देते हैं। 

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार भाटिया में कहा कि यदि कोई सचमुच में यशवंत राव केलकर के जीवन वृतांत को जानना चाहता है तो पहले उन्हें पढ़ें। उनके कार्य पद्धति को सीखने से पहले उनके ऊपर आधारित लेखों और पुस्तकों से होकर गुजरना चाहिए। तभी आप यशवंत राव केलकर के विराट व्यक्तित्व को जान सकेंगे। भाटिया ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में एक खास पद्धति को विकसित करने में यशवंतराव केलकर की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि यशवंतराव खेलकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन शिल्पी थे।वह भले ही इसके संस्थापक ना रहे हों लेकिन उन्होंने इस संगठन को नई रूप में ढालने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई  वह कहते थे कि विद्यार्थी परिषद से मिले दृष्टिकोण को जीवन में जीने के लिए प्रयोग करना चाहिए । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद केवल विद्यार्थियों के लिए कार्य नहीं करती बल्कि यह एक ऐसी भावी नागरिक को तैयार करने की फैक्ट्री है जो भविष्य में जिस भी जगह रहेंगे वहां पर ही भारतीयता को प्रमुखता से रखते हुए जीवन का निर्वाह करेंगे। उनका मानना था कि कार्यकर्ता जीवन के जिस क्षेत्र में भी जाएगा वहीं अपना मुकाम हासिल कर लेगा। यशवंतराव केलकर कार्यकर्ताओं में विश्वास रखते थे। वह मनुष्य को गुण दोष के आधार पर नहीं नापते थे। उनका मत था कि कार्यकर्ताओं को गुण दोष के सहित स्वीकार करना चाहिए और उसके  सकारात्मक पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए। केलकर ऐसे महान पुरुष थे जिन्हें जितना पढ़ा जाएगा उतना जाना जाएगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने अपने उद्बोधन में कहा कि आजकल के कार्यकर्ताओं को अभ्यास वर्ग में जो भाव प्रदर्शित किए जाते हैं वह यशवंतराव केलकर की देन है। यशवंतराव केलकर के जन्म शताब्दी वर्ष में यह आयोजन काफी पुरानी यादों को ताजा कर रहा है। यशवंतराव केलकर को पुनः मानस पटल पर लाने का यह स्वर्णिम अवसर आज हम सभी को मिला है। उन्होंने कहा कि यशवंतराव केलकर के बारे में जितना कहा जाए उतना कम है । यशवंतराव केलकर ही पहले व्यक्ति थे जो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में महिला सहभागिता, छात्र उपयोगिता के बिंदुओं पर कार्य करने के लिए आगे आए। उनका जीवन तमाम कार्यकर्ताओं के लिए आदर्श का प्रतिमान है। दत्तात्रेय होसबाले ने बताया कि छात्र आंदोलन के सिद्धांत को कैसे कार्य करना चाहिए यह यशवंतराव केलकर के व्यक्तित्व से पता चलता है। वह अपने विद्यार्थियों में विश्वास रखते थे। वह अपने व्यक्तिगत जीवन में लोगों को अनुभव करने के लिए छोटी-छोटी यात्राएं करते थे। वह कभी भी अपने विद्यार्थियों को ही दृष्टि से नहीं देखते थे। उनका मानना था कि विद्यार्थी कभी भी छोटा या बड़ा नहीं होता। उनका अपना यह तर्क था कि व्यक्ति को अपना कार्य स्वयं करना चाहिए ना कि उसे दूसरों पर थोपना चाहिए। वह कहते थे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से प्राप्त गुण को लेकर कार्यकर्ता जब सामाजिक जीवन और राजनीतिक जीवन में जाकर के रूप में रहेंगे तो वह समाज के उत्थान के लिए अपनी आहुति देंगे। उनका चरित्र काफी विराट है और उन्हें समझाने के लिए अध्ययन चिंतन और मनन की आवश्यकता है।

कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती यशवंत राव केलकर और विवेकानंद की प्रतिमा के समक्ष दीपक शंकर के हुआ। अतिथियों का स्वागत स्मृति चिन्ह लेकर किया गया। इस अवसर पर मिलिंद भंगी ने अपने मराठी से हिंदी में रूपांतरित यशवंत राव केलकर के ऊपर अभिवाचन प्रस्तुति प्रदर्शित की  इस प्रस्तुति के अंदर यशवंतराव केलकर के जीवन वृतांत को बेहद सुंदर और आकर्षक ढंग से सैंड आर्ट के जरिए दिखाया गया है। अभाविप दिल्ली के प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का मंच संचालन मित्रविंदा करनवाल ने किया।

जनजाति सांस्कृतिक समागम को संबोधित करेंगे गृह मंत्री अमित शाह


नई दिल्ली, 11 मई। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में जनजाति सांस्कृतिक समागम की औपचारिक घोषणा की गयी। समागम आगामी 24 मई को महान जननायक भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में नई दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन के मुख्य अतिथि भाजपा के वरिष्ठ नेता व भारत सरकार में गृह मंत्री अमित शाह होंगे।  प्रेस वार्ता में बताया की भगवान बिरसा मुंडा भारत में स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अस्मिता और सामुदायिक चेतना के प्रतीक रहे हैं।

यह समागम अपने आपमें अनोखा है। इस में देशभर की 500 से अधिक जनजातियों के डेढ़ लाख प्रतिभागियों की उपस्थिति संभावित है। आयोजन में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागी अपने स्वयं के खर्च से दिल्ली आने वाले है। अपने आप में यह बड़ा सांस्कृतिक आयोजन होगा। अपनी धर्म-संस्कृति, परम्परा के विषय को लेकर जनजाति समाज राजधानी दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में पहली बार एकत्रित हो रहा है। 

भव्य सांस्कृतिक शोभा यात्रा यह कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेगा। अपनी पारंपरिक वेशभूषा में देश से विभिन्न हिस्सों से आए जनजति महिला-पुरुष इस शोभायात्रा में सम्मिलित होकर संस्कृति-परम्परा का दर्शन दिल्ली वासियों को कराएँगे। यह शोभा यात्रा पाँच विभिन्न स्थलों से प्रारंभ होगी, जो जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करेगी। ये यात्राएँ लाल किले पर आकर एकत्रित होंगी, जहाँ इसके पश्चात एक जनसभा का आयोजन किया गया है। भारत सरकार में गृहमंत्री अमित शाह इस आयोजन को संबोधित करेंगे। तू मैं एक रक्त, वनवासी, ग्रामवासी, नगरवासी, हम सब भारतवासी इस समागम का मुख्य विचार सूत्र रहेगा।

इस समागम के प्रमुख उद्देश्य गवान बिरसा मुंडा की विरासत को याद करना, जनजतियों की समृद्ध सांस्कृतिक एवं गौरवशाली परंपरा का स्मरण करना, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और संवाद के लिए एक राष्ट्रीय मंच तैयार करना तथा  सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करना है। 

इस समागम में पहली बार दूर-दराज क्षेत्र से वनवासी बंधुओं दिल्ली आरहे हैं।आयोजन में 20 विभाग बनाएं है और विभिन्न समितियों का गठन किया है। दिल्ली के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों पर आवास, भोजन-पानी, यातायात, चिकित्सा, सुरक्षा और स्वच्छता की व्यवस्था की है।

यह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ आने का महत्वपूर्ण अवसर है। दिल्ली में होनेवाला यह सांस्कृतिक समागम ‘तू-मैं, एक रक्त’ इस राष्ट्रीय भाव को अधिक दृढ़ करेगा।

Sunday, 10 May 2026

नॉन-कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड अग्रसेन कॉलेज में वार्षिकोत्सव सम्पन्न


नई दिल्ली, 10 मई। नॉन-कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय शिक्षण केंद्र का वार्षिकोत्सव अत्यंत उत्साह, गरिमा एवं सांस्कृतिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय अतिथि महोदया, प्रिंसिपल महोदय एवं शिक्षक प्रभारी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने पूरे वातावरण को ज्ञान, संस्कृति और सकारात्मक ऊर्जा से आलोकित कर दिया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डी. डी. इंडिया की वरिष्ठ सलाहकार संपादक सकल भट्ट जी का महाविद्यालय परिवार द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान अतिथि सकल भट्ट एवं शिक्षक प्रभारी पुनीता अग्रवाल, तथा दिल्ली यूनिवर्सिटी शिक्षक संघ की कोषाध्यक्ष आकांक्षा खुराना व तेज नारायण ओझा जी द्वारा महाविद्यालय की  द्विभाषिक पत्रिका “अग्रजा” के चौथे अंक का विमोचन भी किया गया,  जिसने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की।

इसके पश्चात् शिक्षक प्रभारी पुनीता अग्रवाल जी ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए पूरे सत्र में संचालित होने वाली शैक्षणिक उपलब्धियों,  सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं सह-शैक्षणिक आयोजन पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बी.ए की छात्राओं द्वारा 94 तथा बी.कॉम की छात्राओं द्वारा 92 प्रतिशत परीक्षा परिणाम प्राप्त कर महाविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान की गई है। अपने सम्बोधन में 10 मई ‘मातृशक्ति दिवस’ की विशेष शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने शिक्षक साथियों के योगदान और छात्राओं के सर्वागीण विकास के लिए उनके द्वारा किए गए प्रयासों की विशेष सराहना की. छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने शिक्षा, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं होती,  बल्कि यह व्यक्तित्व निर्माण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भी माध्यम है। साथ ही उन्हें निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहने के लिए अपनी शुभाकामनाएं दी. 

डी. डी. इंडिया की वरिष्ठ सलाहकार संपादक श्रीमती सकल भट्ट जी जिन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में छात्राओं को जीवन, करियर और आत्मनिर्भरता से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि निरंतर परिश्रम, अनुशासन और सकारात्मक सोच ही सफलता की वास्तविक कुंजी है।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संजीव तिवारी जी ने अपने संबोधन में छात्राओं को अनुशासन, परिश्रम और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने छात्राओं की उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शिक्षक-प्रभारी एवं सभी शिक्षकगण एवं महाविद्यालय परिवार को बधाई दी.

वरिष्ठ शिक्षक तेज सिंह ओझा जी ने भी 10 मई के पावन अवसर पर भारत के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन 1857 के अमर शहीदों को श्रधासुमन अर्पित करते हुए अपने संक्षिप्त किंतु सारगर्भित वक्तव्य में शिक्षा, संस्कार और अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डाला।

वार्षिकोत्सव पुरस्कार वितरण के अंतर्गत शैक्षणिक गतिविधियों में प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं अन्य महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त पूरे सत्र में आयोजित होने वाले विभिन्न गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के विजेता प्रतिभागियों को भी पुरस्कार प्रदान किए गए। पुरस्कार प्राप्त कर छात्राओं के चेहरे उत्साह और आत्मविश्वास से दमक उठे।

अंत में विश्वविद्यालय कुलगीत एवं राष्ट्रगान के सामूहिक गायन ने पूरे वातावरण को भावपूर्ण और गरिमामय बना दिया। समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ| कार्यक्रम की सफलता में महाविद्यालय परिवार, शिक्षकगण,  नॉन-टीचिंग स्टाफ एवं छात्राओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

Wednesday, 15 April 2026

डॉ. नरेंद्र बने पीजीडीएवी महाविद्यालय स्टाफ एसोसिएशन के उपाध्यक्ष चुने गए


नई दिल्ली, 15 अप्रैल। दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध पीजीडीएवी महाविद्यालय में हाल ही में हुए सम्पन्न स्टाफ एसोसिएशन के चुनावों में डॉ. नरेंद्र उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए। पीजीडीएवी महाविद्यालय के इतिहास में पहली बार स्टाफ एसोसिएशन के चुनाव आयोजित किए गए हैं। चुनाव में सभी शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सूझबूझ से मतदान किया। बता दें कि डॉ. नरेंद्र मूल रूप से पलवल जिले के बडौली गाँव के रहने वाले नरेंद्र का पीजीडीएवी महाविद्यालय से गहरा नाता है। उन्होंने इसी महाविद्यालय से हिंदी ऑनर्स में बी.ए. की उपाधि प्राप्त की थी। यहीं से उनकी शैक्षणिक यात्रा शुरू हुई थी। उनका सपना था कि जिस महाविद्यालय में वह छात्र बनकर आए थे, उसी महाविद्यालय में शिक्षक बनकर पढ़ाएँ जो सपना साकार भी हुआ। 

आगे उन्होने स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए  दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध राजधानी महाविद्यालय से एम.ए. की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद  उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से एम.फिल. किया। तत्पश्चात दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से पीएच.डी. की उपाधि हासिल की। अपने संघर्ष और समर्पण से उन्होंने अपना सपना साकार किया और आज  वह पीजीडीएवी महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। अपनी जीत को नरेंद्र ने सभी वरिष्ठ शिक्षकों और सहकर्मी शिक्षकों की जीत बताते हुए उन्होंने कहा कि मैं महाविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों के हितों के लिए निरंतर संघर्ष करते रहेंगे।

Saturday, 11 April 2026

कुटुम्ब में भी स्वदेशी की आवश्यकता है : जे.नंद कुमार


नई दिल्ली, 11 अप्रैल। इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र, दिल्ली द्वारा रामजस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में भारत मंथन पर्व संगोष्ठी का समापन हुआ। पांच दिवसीय संगोष्ठी का विषय मानव कल्याण के परिपेक्ष्य में पंच परिवर्तन का क्रियान्वयन : चुनौतियां एवं समाधान था। मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रज्ञा प्रवाह के श्री जे. नंद कुमार जी ने पंचपरिवर्तन की बात करते हुए कहा कि परिवर्तन का प्रयास हमे खुद से शुरू करना चाहिए। भागवत गीता का उदाहरण देते हुए कहा कि श्रेष्ठ लोगों का आचरण देख कर समाज में परिवर्तन आता है। आत्म पहचान हमे मिलना चाहिए जिससे राष्ट्र आगे बढ़े गा, राष्ट्रों के विनाश का कारण बोध है। भारत में नेतृत्व बहुत मजबूत है, जिस कारण भारत आगे बढ़ रहा है। भारत में एक रचनात्म अल्पसंख्यक समाज है, जिसके कारण भारत है। जिसके कारण हमारे देश में मेमोरी लॉस का दौर नहीं आया है। जेन्जी के रील देखने की आदत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज युवा अपने राइट की ज्यादा बात करते और ड्यूटी को कम तरजीह देते हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होने आगे कहा की आप परिवार में तीन लोग हैं तो तीनों मोबाईल पर रील देखते हैं। आज टीवी पर जो सीरियल आता है उसे आप परिवार के साथ देख नहीं सकते। राईट के नाम आज समाज में आय दिन आत्महत्या हो रही हैं,  इसपर विचार करना चाहिए; यह चिंता का विषय है। भारत का सोसियल स्टकचर खराब हो रहा है, परिवार को शक्तिशाली बनाने से परिवर्तन आएगा और समाज बचेगा। मोबाईल उपवास की बात करते हुए उन्होंने कहा कि मोबाईल से दूरी बढ़ाए तो परिवार बचेगा। परिवार के साथ आपको धार्मिक स्थलों के भ्रमण पर जाना चाहिए जिससे आप भारत को देख और जान सकेंगे उसी से परिवार प्रबोधन होगा। साल में एक बार परिवार एक साथ आप को उत्सव मनाने का तय करना चाहिए। स्मृति को बचाने का कम कीजिए स्मृति नाश होने से बुद्धि नाश हो जाएगी। उन्होंने स्वदेशी की चर्चा करते हुए स्वामि विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि वह पूर्णतः स्वदेशी थे। अंत में उन्होंने महात्मागांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधीजी ने कहा था कि बाहर से अच्छे विचार आते हैं तो उनका स्वागत है,  दूषित विचार को प्रवेश नहीं देना है।

इस मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो बलराम पाणि जी ने कहा कि पंचपरिवर्तन में पांच इकाई हैं, पहला मैं, दूसरा परिवार, तीसरा समाज, चौथा देश, पांचवा विश्व है। उन्होंने कहा कि समरस्ता से देश मजबूत होगा, स्वदेशी से देश मजबूत होगाआगे उन्होने कहा कि एक विद्वान होता है और एक विद्यावान होता है। रावण विद्वान था, और हनुमान विद्यावान थे। आप विद्यावान बने।

इस आयोजन की अध्यक्षता केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा के कुलगुरु प्रो टंकेश्वर कुमार जी ने कहा कि पंचपरिवर्तन को अपने जीवन में उतारने की कोशिश करता हूँ। लेकिन मेरे माता-पिता पंचपरिवर्तन से ज्यादा जुड़े थे, उन्होंने अपने जीवम में इसे आत्मसात किया था। आज समाज में पंचपरिवर्तन नहीं है, परिवर्तन हो गया है। पंचपरिवर्तन का क्रियान्वयन बेहद महत्वपूर्ण है जिससे समाधान निकलेगा। इसकी जरूरत विश्व को भी है। 

इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र के प्रमुख विनोद शर्मा विवेक जी ने स्वागत वक्तव्य दिया। किरोड़ी मल कालेज के प्रो राकेश पाण्डेय जी ने गोष्ठी का वृत प्रस्तुत करते हुए कहा कि अध्ययन केंद्र से हर वर्ग के लोग जुड़े हुए हैं। केंद्र में चार गतिविधियां चल रहीं हैं। केंद्र समकालीन विषयों पर पुस्तकें भी प्रकाशित करता है। इस बार भारत मंथन में पंचपरिवर्तन विषय को लेकर अलग-अलग कॉलेजों में मंथन हुआ। इस मंथन पर्व में कुल 118 शोधपत्र पढ़े गए। वहीं इस मौके पर चराचर सृष्टि : भारतीय दृष्टि नामक पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया।

नॉन-कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड की प्रमुख प्रो गीता भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस मौके पर शांति निकेतन की पूर्व छात्रा संगीत के बनारस घराने की युवा गायिका श्रद्धा द्विवेदी ने निश्चित होगा परिवर्तन जाग रहा है जन गणमन सुंदर गीत का गाया किया। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिलभरतीय अधिकारी श्रीमान अजेय कुमार के साथ अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। वहीं इस मौके पर महाराज अग्रसेन कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो संजीव तिवारी, प्रो आर एन दुबे, प्रो राजकुमार भाटिया, प्रो भारती अग्रवाल, प्रो मोनिका अरोरा, अभिषेक सिंह और दिल्ली विश्वविद्यालय के सैकड़ों प्रिंसिपल, प्रोफेसर के साथ शोधार्थी व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Monday, 30 March 2026

समावेशी के साथ भेदभाव से रहित है भारतीय संस्कृति: प्रो. संजीव शर्मा


नई दिल्ली, 30 मार्च। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के समवेत सभागार में भारतीय ज्ञान परंपरा : सनातनता और विश्व कल्याण विषय पर आठवां श्री देवेन्द्र स्वरूप स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रुप में महात्मा गांधी मोतिहारी केंद्रीय विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति व चौधरी चरण सिंह मेरठ विश्विद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. संजीव कुमार शर्मा उपस्थित रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि मेरा परिचय देवेंद्र स्वरूप जी से एक पाठक के रूप में हुआ था। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की सबसे पुरानी संस्कृति है। विश्व में सबसे पहले ग्रंथ लिखने वाले भारत की ज्ञान यात्रा बहुत लंबी है। भारत सत्य का अनुसंधान कर रहा है। भारतीय संस्कृति विश्व द्वारा वरणीय संस्कृति है। उन्होंने बताया कि भारत की जिज्ञासा, प्रश्न पूछने की परंपरा, सनातन ज्ञान परंपरा बहुत पुरानी है।

आचार्य पिप्पलाद के संदर्भ में बताते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा प्रश्न पूछने और शास्त्रार्थ करने पर आधारित है। भारत की ज्ञान परंपरा ने दूसरे विचार को कभी प्रतिवाद नहीं समझा। उन्होंने बताया कि ज्ञान में और अधिक वृद्धि के लिए जिज्ञासा, प्रश्न पूछने की परंपरा आवश्यक है। उन्होंने महाभारत के यक्ष प्रश्न वाली घटना का वर्णन भी किया। प्रो. कुमार ने कहा कि श्रेष्ठ लोगों के मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने बताया कि एकात्मकता का भाव भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण भाव है। हम वसुधैव कुटुम्बकम की मूल भावना को मानने वाले लोग हैं। सर्वे भवन्तु सुखिन: की कामना करने वाला सबके कल्याण का भाव रखने का विचार हमारी ज्ञान परंपरा में ही निहित है। विश्व की चिंता करने वाली एक मात्र संस्कृति भारतीय संस्कृति है। भारतीय ज्ञान परंपरा समावेशी के साथ भेदभाव रहित है। यह लोगों में सबको साथ लेकर चलने का भाव पैदा करती है। भारतीय ज्ञान परंपरा संवाद की परंपरा है। श्रीमद्भागवत के अठारहवें अध्याय का जिक्र करते हुए प्रो. कुमार ने कहा कि गीता का मूल तत्व वही है जो आपको उचित लगे उसे करें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इं.गां.रा.क.केन्द्र न्यास के अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार श्री रामबहादुर राय ने कहा कि गीता के अंदर लोकतंत्र विद्यमान है। क्योंकि अर्जुन कृष्ण से कई प्रश्न पूछते हैं और कृष्ण प्रत्येक प्रश्नों का उत्तर देते हैं। क्या भारत के राजनैतिक दल इस कसौटी पर खरे उतरते हैं, यह प्रश्न किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली कहीं संस्थाओं में कैद होकर न रह जाए इसके लिए प्रयास किया जाना चाहिए। नई शिक्षा नीति में अनके संभावनाएं हैं। इस लंबी साधना में देवेन्द्र स्वरूप जी की पुस्तके सहायक सिद्ध होंगी। 

कार्यक्रम के दौरान स्वागत भाषण एवं परिचय कलानिधि के विभागाध्यक्ष प्रो.(डॉ.) रमेश चन्द्र गौड़ ने दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 से यह स्मारक व्याख्यान आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान प्रो. देवेन्द्र स्वरूप की डायरियों पर आधारित “भारत की ज्ञान यात्रा” पुस्तकों के पोस्टर का भी लोकार्पण किया गया। डायरियों का डिजिटलाइजेशन हो चुका है और जल्द प्रकाशित भी हो जाएंगी। यह तीन खंडों की यह पुस्तकें सभी संस्थाओं, विद्यालयों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी । इस मौके पर दिल्ली विश्विविद्यालय से संबद्ध महाराज अग्रसेन कालेज़ के प्राचार्य प्रो. संजीव तिवारी  व  प्रो. ऋतु अग्रवाल, प्रो. शिव कुमार आदि उपस्थित थे। 

Thursday, 19 March 2026

चल वैजयंती अंतर महाविद्यालय वाद- विवाद प्रतियोगिता में हिन्दू कॉलेज विजयी

दिलीप यादव 
नई दिल्ली, 19 मार्च। डॉ भीमराव अंबेडकर कॉलेज की 'संवाद' वाद विवाद समिति ने विकसित भारत के लिए जेन जी कल्चर अनिवार्य है विषय पर चल वैजयन्ती अंतरमहाविद्यालय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें 13 महाविद्यालयों के कुल 26 प्रतिभागियों ने विषय के पक्ष और विपक्ष में विचार रखे। समिति द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रम में  कॉलेज के प्राचार्य प्रो सदानंद प्रसाद के साथ निर्णायक मंडल में  दिल्ली विश्वविद्यालय  के प्रौढ़, शिक्षा, सतत और प्रसार विभाग के सह प्राध्यापक डॉ. वंदना सिसोदिया, श्यामलाल कॉलेज के हिंदी विभाग के सह प्राध्यापक डॉ. राज कुमार प्रसाद और दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार श्री निहाल पाल सिंह भी उपस्थित रहे।

चल वैजयन्ती प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार हिन्दू कॉलेज के वैभव और अनंत ने जीता। द्वितीय पुरस्कार लेडी श्री राम कॉलेज के कृष्णा पाठक और आर्या दीक्षित और तृतीय पुरस्कार डॉ भीमराव अम्बेडकर कॉलेज के तनु त्रिवेदी और नंदिनी ने प्राप्त किया। प्रोत्साहन पुरस्कार, आत्मा राम सनातन के आदित्य और महक के साथ मिराण्डा हाउस कॉलेज के कृणाली और स्नेहा  ने प्राप्त किया। कॉलेज प्राचार्य प्रो सदानंद प्रसाद, संवाद समिति संयोजक प्रो राजेश उपाध्याय और सह संजोजक सुश्री दिलजीत कौर और अतिथियों ने चल वैजयन्ती ट्रॉफी विजेताओं को प्रदान की। 

कॉलेज प्राचार्य प्रो. सदानंद प्रसाद ने  सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि वाद -विवाद का मंच विद्यार्थियों को अपनी बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। संवाद वाद - विवाद समिति के संयोजक प्रो. राजेश उपाध्याय ने कहा कि यह प्रतियोगिता सिर्फ ट्रॉफी जीतने तक ही सीमित नहीं है। अगर आप प्रतिभागियों को ध्यानपूर्वक सुनते भी हैं तो समसामयिक घटनाओ से परिचित होते है। डॉ वंदना सिसोदिया ने कहा कि विषय युवाओ को कनेक्ट करता है। निहाल पाल सिंह ने कहा आपकी प्रस्तुति में  आपकी प्रतिभा की झलक है। डॉ राज कुमार प्रसाद ने विकसित भारत के संदर्भ में नई पीढ़ी देश की प्रगति की बात कर रही थी  जो डिजिटल आधारित है।

प्रतियोगिता की शुरुआत अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीपार्जन के साथ हुई। अतिथियों का स्वागत पौध देकर किया गया। मंच संचालन सूर्योम और पत्रकारिता विभाग की मेधावी छात्रा विमलेश ने किया। धन्यवाद ज्ञापन वाद विवाद समिति की संयोजिका दिलजीत कौर किया। इस अवसर पर प्रो बिजेंद्र कुमार, प्रो जया वर्मा, प्रो शशि रानी, प्रो सीमा सोढ़ी, अर्चना माथुर, डॉ नेहा शर्मा, डॉ के के शर्मा,  डॉ विनीत कुमार, राकेश कुमार, डॉ प्रवीण झा, डॉ सुभाष गौतम, डॉ आदर्श कुमार,  डॉ रंजीत कुमार, डॉ हरिकिशन के साथ भारी मात्रा में विद्यार्थी उपस्थित रहे।