नई दिल्ली, 11 अप्रैल। इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र, दिल्ली द्वारा रामजस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में भारत मंथन पर्व संगोष्ठी का समापन हुआ। पांच दिवसीय संगोष्ठी का विषय मानव कल्याण के परिपेक्ष्य में पंच परिवर्तन का क्रियान्वयन : चुनौतियां एवं समाधान था। मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रज्ञा प्रवाह के श्री जे. नंद कुमार जी ने पंचपरिवर्तन की बात करते हुए कहा कि परिवर्तन का प्रयास हमे खुद से शुरू करना चाहिए। भागवत गीता का उदाहरण देते हुए कहा कि श्रेष्ठ लोगों का आचरण देख कर समाज में परिवर्तन आता है। आत्म पहचान हमे मिलना चाहिए जिससे राष्ट्र आगे बढ़े गा, राष्ट्रों के विनाश का कारण बोध है। भारत में नेतृत्व बहुत मजबूत है, जिस कारण भारत आगे बढ़ रहा है। भारत में एक रचनात्म अल्पसंख्यक समाज है, जिसके कारण भारत है। जिसके कारण हमारे देश में मेमोरी लॉस का दौर नहीं आया है। जेन्जी के रील देखने की आदत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज युवा अपने राइट की ज्यादा बात करते और ड्यूटी को कम तरजीह देते हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होने आगे कहा की आप परिवार में तीन लोग हैं तो तीनों मोबाईल पर रील देखते हैं। आज टीवी पर जो सीरियल आता है उसे आप परिवार के साथ देख नहीं सकते। राईट के नाम आज समाज में आय दिन आत्महत्या हो रही हैं, इसपर विचार करना चाहिए; यह चिंता का विषय है। भारत का सोसियल स्टकचर खराब हो रहा है, परिवार को शक्तिशाली बनाने से परिवर्तन आएगा और समाज बचेगा। मोबाईल उपवास की बात करते हुए उन्होंने कहा कि मोबाईल से दूरी बढ़ाए तो परिवार बचेगा। परिवार के साथ आपको धार्मिक स्थलों के भ्रमण पर जाना चाहिए जिससे आप भारत को देख और जान सकेंगे उसी से परिवार प्रबोधन होगा। साल में एक बार परिवार एक साथ आप को उत्सव मनाने का तय करना चाहिए। स्मृति को बचाने का कम कीजिए स्मृति नाश होने से बुद्धि नाश हो जाएगी। उन्होंने स्वदेशी की चर्चा करते हुए स्वामि विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि वह पूर्णतः स्वदेशी थे। अंत में उन्होंने महात्मागांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधीजी ने कहा था कि बाहर से अच्छे विचार आते हैं तो उनका स्वागत है, दूषित विचार को प्रवेश नहीं देना है।
इस मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में दिल्ली
विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो बलराम पाणि जी ने कहा कि पंचपरिवर्तन में
पांच इकाई हैं, पहला मैं, दूसरा परिवार, तीसरा समाज, चौथा देश,
पांचवा
विश्व है। उन्होंने कहा कि समरस्ता से देश मजबूत होगा, स्वदेशी से देश
मजबूत होगा। आगे उन्होने कहा
कि एक विद्वान होता है और एक विद्यावान होता है। रावण विद्वान था, और हनुमान विद्यावान थे। आप विद्यावान
बने।
इस आयोजन की अध्यक्षता केंद्रीय
विश्वविद्यालय हरियाणा के कुलगुरु प्रो टंकेश्वर कुमार जी ने कहा कि पंचपरिवर्तन
को अपने जीवन में उतारने की कोशिश करता हूँ। लेकिन मेरे माता-पिता पंचपरिवर्तन से ज्यादा
जुड़े थे, उन्होंने अपने
जीवम में इसे आत्मसात किया था। आज समाज में पंचपरिवर्तन नहीं है, परिवर्तन हो गया है। पंचपरिवर्तन का
क्रियान्वयन बेहद महत्वपूर्ण है जिससे समाधान निकलेगा। इसकी जरूरत विश्व को भी
है।
इंद्रप्रस्थ अध्ययन केंद्र के प्रमुख
विनोद शर्मा विवेक जी ने स्वागत वक्तव्य दिया। किरोड़ी मल कालेज के प्रो राकेश
पाण्डेय जी ने गोष्ठी का वृत प्रस्तुत करते हुए कहा कि अध्ययन केंद्र से हर वर्ग
के लोग जुड़े हुए हैं। केंद्र में चार गतिविधियां चल रहीं हैं। केंद्र समकालीन
विषयों पर पुस्तकें भी प्रकाशित करता है। इस बार भारत मंथन में पंचपरिवर्तन विषय को
लेकर अलग-अलग कॉलेजों में मंथन हुआ। इस मंथन पर्व में कुल 118
शोधपत्र पढ़े गए। वहीं इस मौके पर चराचर सृष्टि : भारतीय दृष्टि नामक पुस्तक का
लोकार्पण भी किया गया।
नॉन-कॉलेजिएट महिला शिक्षा बोर्ड की
प्रमुख प्रो गीता भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस मौके पर शांति निकेतन की पूर्व
छात्रा व संगीत के
बनारस घराने की युवा गायिका श्रद्धा द्विवेदी ने निश्चित होगा
परिवर्तन जाग रहा है जन गणमन सुंदर गीत का गाया किया। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिलभरतीय अधिकारी श्रीमान अजेय कुमार
के साथ अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। वहीं इस मौके पर महाराज अग्रसेन कॉलेज के
प्रिंसिपल प्रो संजीव तिवारी, प्रो आर एन दुबे, प्रो राजकुमार भाटिया, प्रो भारती अग्रवाल, प्रो मोनिका अरोरा, अभिषेक सिंह और दिल्ली विश्वविद्यालय
के सैकड़ों प्रिंसिपल,
प्रोफेसर के साथ शोधार्थी व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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