नई दिल्ली, 17 जनवरी। डॉ भीम राव अम्बेडकर कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में मनोहर लाल तथा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के तरुण कुमार उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि अम्बेडकर कॉलेज के प्राचार्य सदानंद प्रसाद तथा ज्योति नगर के पुलिस अधिकारी वेद प्रकाश जी उपस्थित थे।
मुख्य वक्ता ने विवेकानंद के जीवन की विशेषता बताते हुए 1893 शिकागो धर्म संसद में विवेकानंद का भारत के प्रतिनिधित्व तथा उनके के विचारों को बताते हुए कहा की आज के युवाओं को चरित्रवान बनाना चाहिए और समाज को एक अच्छे दिशा की ओर ले जाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने विवेकानंद द्वारा श्रीमद्भागवत गीता को सभी धर्मों का आधार बताए जाने को लेकर विस्तार से बताया। युवाओं से आग्रह किया की गुरुओं का जितना सम्मान करेंगे आपका ज्ञान उतना ही बढ़ेगा तथा अपने लक्ष्य के प्रति सदैव तात्पर्य रहो। उन्होंने ने कहा की लार्ड मैकाले ने भारत पर राज करने के लिए भारत की संस्कृति, गुरुकुल और परंपराएं नष्ट किया, परन्तु भारत की संस्कृति इतना व्याप्त और विशाल है कि उसे समाप्त करना संभव नहीं है। लेकिन इसे संरक्षित करने में आज के युवाओं को पूर्ण योगदान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी कहते थे कि स्वामी विवेकानंद जी को पढ़ने के बाद भारत के प्रति मेरी देशभक्ति की भावना बढ़ गई।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के तरुण कुमार ने युवाओं को संबोधित में कहा की स्वामी जी के विचारों से हमे अध्यात्म और त्याग की भावना की सिख मिलती है। स्वामी विवेकानंद जी की 150वीं जयंती के अवसर पर विश्व विख्यात वाक्य जिनके ओजस्वी वचनों से गूंज उठा था विश्व गगन। वही प्रेरणा पुंज हमारे, स्वामी पूज्य विवेकानंद।। संदर्भित कर युवाओं को स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित करता है। कार्यक्रम के अंत में संचालन समिति ने अतिथियों, वक्ताओं तथा वहां उपस्थित विद्यार्थियों का धन्यवाद किया।

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